बजट में केंद्र सरकार ने 2025 तक चेचक, टीबी और कुष्ठ रोग के खात्मे की बात कही है। इनमें सबसे बड़ी चुनौती टीबी बनेगी। टीबी इंडिया 2016 की रिपोर्ट बताती है कि देश में 25 लाख टीबी मरीज हैं। हर साल लगभग 22 लाख नए मरीज सामने आते हैं।
टीबी मरीजों की मौत की बात करें तो सालाना 2.20 लाख लोग दम तोड़ देते हैं। पुराने मरीजों के अलावा नए मरीजों की रोकथाम विकट समस्या बना हुआ है। एसएन मेडिकल कालेज के क्षय एवं वक्ष रोग विशेषज्ञ डा. जीवी सिंह बताते हैं कि टीबी पूरी तरह से ठीक हो सकती है लेकिन धूम्रपान सबसे बड़ा कारण है। नए मरीजों में 50 फीसदी में बीमारी का कारण धूम्रपान ही है। कारखाने-चूल्हे से निकलने वाली धुआं, प्रदूषित हवा से बीमारी होने का खतरा 20.60 फीसदी है। मौत की सबसे बड़ी वजह मरीजों का दवा छोड़ना है।
देशभर में 88 हजार कुष्ठ रोगी
- कुष्ठ रोग से बचने के लिए चिकित्सा विज्ञानियों ने माइक्रोबैक्टीरियम इंडकस ‘प्रानि’ वैक्सीन तैयार की है। मरीजों पर उपयोग करने से पहले प्रयोग चल रहा है। संभवत: जल्द वैक्सीन बाजार में आ जाएगी।
राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य बैक्टीरियल रोग संस्थान के निदेशक डा. यूडी गुप्ता बताते हैं कि देश में कुष्ठ रोगियों की संख्या 88,600 हैं। वैक्सीन से रोग का खात्मा किया जा सकेगा। देश से बड़ी चेचक खत्म हो चुकी है, छोटी चेचक (चिकनपॉक्स) बची है। सीएमओ डा. बीएस यादव बताते हैं कि ये मौसमी बीमारी हैं, जो गर्मी के दिनों में होती है। इलाज के बाद बीमारी ठीक हो जाती है।