आयकर विभाग की पांच दिन चली सर्च में कथित तौर पर आधे दाम पर आयात दिखाकर टैक्स बचाने और बाद में उत्पाद महंगे दाम पर बेचकर आयकर चोरी करने का नेटवर्क सामने आया है। जांच में पिछले पांच साल में शेल कंपनियों, ट्रस्ट और अन्य माध्यमों के जरिए करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये विदेश भेजे जाने के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।
आयातित माल की कीमत कागजों में आधी दिखाकर टैक्स बचाने और शेष रकम शेल कंपनियों के जरिये विदेश भेजने के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। ताजगंज समेत देशभर के 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत 350 से ज्यादा फर्मों के ठिकानों पर पांच दिन चली आयकर विभाग की सर्च में पिछले पांच वर्षों के दौरान एक लाख करोड़ रुपये से अधिक विदेश भेजे जाने के साक्ष्य मिले हैं। जांच में आयात के साथ उत्पादों की बिक्री से हुई कमाई कम दिखाकर दोहरे स्तर पर टैक्स चोरी किए जाने की बात भी सामने आई है।
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विभाग के अधिकारी अब इन कंपनियों से वसूली के साथ ही आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अन्य एजेंसियों से समन्वय कर रहे हैं। जांच में पता चला है कि चीन, मलयेशिया, सिंगापुर, हांगकांग जैसे देशों से भारत के कारोबारी बड़ी मात्रा में सामान का आयात कर रहे हैं। भारत में आयात करने पर काफी टैक्स चुकाना पड़ता है। ऐसे में टैक्स को बचाने के लिए कागजों में विदेशी कंपनी से सामान आधे दाम पर खरीदना दिखाकर डिलीवरी ले ली जाती है। इसके बाद आधी रकम तो नियमानुसार भेजकर टैक्स भर देते हैं लेकिन बाकी की रकम पहुंचाने के लिए इन्हीं आगरा, मुंबई, जयपुर, उदयपुर व अन्य शहरों में स्थित शेल कंपनियों, ट्रस्ट व धर्मार्थ संस्थाओं का सहारा लिया जाता है।
इन्हें दान या चंदे के रूप में पैसा देने के बाद कई बार देश के भीतर मौजूद शेल कंपनियों के खातों में घुमाने के बाद विदेशी शेल कंपनियों के जरिये सामान भेजने वाली विदेशी कंपनी तक रकम पहुंचाई जाती है। इस पूरी कवायद से जहां एक ओर आयात करते समय टैक्स चोरी की जाती है। वहीं, देश के भीतर आयात किए गए उत्पाद को महंगे दाम पर बेचकर ज्यादा कालाधन कमाकर टैक्स चोरी होती है। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस गड़बड़ी में शामिल फर्मों और लेनदेन का फर्जी सत्यापन कर सर्टिफिकेट जारी करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट यह कालाधन कहां खपा रहे हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
इन्हें दान या चंदे के रूप में पैसा देने के बाद कई बार देश के भीतर मौजूद शेल कंपनियों के खातों में घुमाने के बाद विदेशी शेल कंपनियों के जरिये सामान भेजने वाली विदेशी कंपनी तक रकम पहुंचाई जाती है। इस पूरी कवायद से जहां एक ओर आयात करते समय टैक्स चोरी की जाती है। वहीं, देश के भीतर आयात किए गए उत्पाद को महंगे दाम पर बेचकर ज्यादा कालाधन कमाकर टैक्स चोरी होती है। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस गड़बड़ी में शामिल फर्मों और लेनदेन का फर्जी सत्यापन कर सर्टिफिकेट जारी करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट यह कालाधन कहां खपा रहे हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।