सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ समुदाय ऐसे हैं जिनमें अभी भी बाल विवाह का प्रचलन है। अक्षय तृतीया (अख तीज) पर बड़ी संख्या में शादियां होती हैं। बड़े सहालग की आड़ लेकर लोग बाल विवाह भी करा देते हैं। इन्हें रोकने के लिए शासन ने टास्क फोर्स गठन करने का निर्देश दिया है। हिंदू पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया (अख तीज) और फुलेरा दूज के मुहूर्त ऐसे होते हैं जिनमें सर्वाधिक शादियां होती हैं। बाल विवाह पर प्रतिबंध के बावजूद कुछ समुदाय ऐसे होते हैं जो इन मुहूर्त में बाल विवाह कराते हैं। इस वर्ष भी अक्षय तृतीया (नौ मई) पर प्रदेश में बाल विवाह होने की आशंका है। हालांकि इस बार अक्षय तृतीया पर शादी के मुहूर्त पर धर्माचार्यों में मतभेद है। फिर भी शासन एहतियात बरत रहा है।
प्रमुख सचिव मोनिका एस गर्ग ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि बाल विवाह रोकने को सतर्कता बरतें। उनका कहना है कि एसएसपी की ओर से नामित राजपत्रित अधिकारी की अध्यक्षता में जिला परिवीक्षा अधिकारी के समन्वय से जिला स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास विभाग के अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से टास्क फोर्स का गठन किया जाए। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार जिस बालिका की आयु 18 वर्ष और बालक की आयु 21 वर्ष नहीं हुई है। उनकी शादी नहीं कराई जा सकती है।