मथुरा में तंत्र सिद्धि के लिए छह वर्ष पूर्व मासूम की बलि देने वाले तांत्रिक और उसके दो साथियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। बलि देने के बाद तांत्रिक ने शव को श्मशान में एक गड्डे में दबा दिया था।
बरसाना के गांव गाजीपुर निवासी गिरिधारी उर्फ गौरव का पांच वर्षीय पुत्र हेमंत फरवरी 2012 को स्कूल से लौटकर घर से खेलने के लिए गया था। इसके बाद वापस नहीं लौटा। काफी खोजबीन करने पर रात करीब 10:30 बजे उसका शव श्मशान में गड्डे में दबा मिला था। हेमंत के शव पर रोली लगी थी, कलावा भी बंधा था। पुलिस ने शक के आधार गांव के बाहर रहने वाले बाबा रंगनाथ दास से पूछताछ की तो शक सही निकला।
इस पर तांत्रिक बाबा रंगनाथ दास, गांव के बीरबल और एक महिला कलावती पत्नी केवल को हेमंत की हत्या के आरोप में जेल भेज दिया गया। फिलहाल जमानत पर चल तीनों अभियुक्तों को एडीजे सप्तम के न्यायाधीश हरविंदर सिंह ने आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
एडीजीसी मदन मोहन उपाध्याय ने बताया कि वारदात के गवाह मृतक के पिता गौरव, ग्रामीण शंकर, भूनी और तोता कोर्ट में गवाह के रूप में पेश हुए थे। निर्णय के बाद तीनों दोषियों को जेल भेज दिया गया है ।
मृतक के पिता गौरव ने बताया कि तांत्रिक गांव के बाहर गोपनीय रूप से तंत्र विद्या करता था तथा उसे ऐसे बालक की तलाश थी जो कि अपने माता पिता की पहली संतान हो। इसलिए उसने बड़े बच्चे हेमंत को निशाना बनाया ।