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16 करोड़ के टेंडर मामले में प्रशासन ने खड़े किए हाथ

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11एमएनपी-16--कलक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत कार्यालय - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। जिला पंचायत के 16 करोड़ रुपये के टेंडरों में कमीशन लिए जाने के मामले में जिला प्रशासन कार्रवाई नहीं कर सका है। किसी भी निर्णय से बचते हुए जिलाधिकारी ने मामला शासन को निर्णय के लिए भेज दिया है। ऐसा तब किया गया है जब जांच समिति ने स्पष्ट टेंडर निरस्त करने की संस्तुति की थी।
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20 मई को अपर जिलाधिकारी और जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी कि जिला पंचायत कार्यालय से उठाए जा रहे 16 करोड़ रुपये के टेंडरों में दस से बीस प्रतिशत का कमीशन खुलेआम लिया जा रहा है। मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच के आदेश दिए थे। समिति में अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग और वरिष्ठ कोषाधिकारी श्यामलाल जायसवाल को शामिल किया गया था।
समिति ने सभी अभिलेखों की जांच कर अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, अवर अभियंता व अन्य कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए थे। तीन दिन चली जांच के बाद समिति ने जिलाधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें टेंडर प्रक्रिया को गलत बताते हुए निरस्त करने की संस्तुति की गई थी।
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इसके बाद हर किसी की नजर जिलाधिकारी के निर्णय पर टिकी हुई थीं। करीब 15 दिन तक फाइल पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद निर्णय के लिए फाइल प्रमुख सचिव पंचायती राज को भेज दी गई है।
खूब चला राजनीतिक सिफारिशों का सिलसिला
जिला पंचायत के टेंडर मामले में कमीशनबाजी की शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। इस बीच राजनीतिक सिफारिशों का सिलसिला भी खूब चला। सूत्रों के अनुसार सत्तारूढ़ दल के छोटे से बड़े नेताओं ने मामले को दबाने के लिए भरपूर कोशिश की। हालांकि समिति द्वारा टेंडर निरस्त करने की संस्तुति के बाद उन्हें निराशा ही हाथ लगी थी।
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निरस्त करने के लिए ये थे प्रमुख कारण
-16 करोड़ के टेंडर के लिए एक ही दिन का समय दिया गया।
-इतने बड़े टेंडरों को कलक्ट्रेट से नहीं बेचा गया।
-सभी टेंडर ऑफलाइन ही किए गए।
-प्रत्येक टेंडर के लिए तीन लोगों ने ही निविदा डाली।
मामले को शासन में भेजा गया है। शासन स्तर से जो भी निर्णय होगा वह मान्य होगा।
महेंद्र बहादुर सिंह, डीएम।
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