शिया समुदाय के अलम और ताजियों का जुलूस पुराने इमामबाड़े से शुरू हुआ। काले लिबास और सिर पर पट्टी बांधे लोग हजरत हुसैन और उनके परिवार की शहादत के जिक्र पर सीनाजनी करते हुए चल रहे थे।
शाहगंज में स्थित चिल्लीपाड़ा से सुबह आठ बजे शिया समुदाय के ताजिए शाहगंज स्थित पुराने इमामबाड़े से निकले। जो कि लाडली कटरा चौराहा, शाहगंज चौराहा, रुई की मंडी, रेलवे डबल फाटक, बारह खंभा, अर्जुन नगर होते हुए सराय ख्वाजा स्थित करबला में सुपुर्द ए खाक किए गए। अंजुमन-ए-पंजतनी शाहगंज के बैनर तले निकाले गए जुलूस में सिर पर सफेद पट्टी बांधे और काले लिबास में लोग सीनाजनी करते हुए चल रहे थे। शाहगंज चौराहे पर पहुंचने के बाद ताजिये के साथ चल रहे बच्चे से लेकर बड़े अजादार करबला के शहीद हजरत इमाम हुसैन, उनके परिवार और साथियों की शहादत को याद करके छुरी, ब्लेड और कमां का मातूम बनाकर अपने जिस्म को रक्तरंजित कर लिया। जुलूस के साथ महिलाएं भी चल रहीं थी। व्यवस्था अली कैसर उर्फ प्यारे मियां, अमीर अहमद, हाजी अख्तर, मशरूर मेहंदी, मोहम्मद अहमद, सिकंदर मिर्जा, शबी हैदर जाफरी, दब्बू, एचएस जाफरी आदि संभाल रहे थे। निसार अहमद ने भी सहयोग किया। रात आठ बजे पुराने इमामबाड़े पर मजलिसे शाम ए गरीबां हुई।
करबला में लगा मेला, शाम तक रही भीड़
न्यू आगरा स्थित करबला में सबसे अधिक ताजिये दफनाए गए। सराख्वाजा स्थित करबला और ताजगंज स्थित गोबर चौकी की करबला में छोटे-बड़े सैकड़ों ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। करबलाओं में मेले सरीखा माहौल था। जगह-जगह लंगर तकसीम कराया जा रहा था।