हेरिटेज कारीडोर की तरह बनाए जा रहे ताजगंज प्रोजेक्ट में कदम दर कदम खामियां ही मिलीं। सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने ताजमहल पूर्वी गेट पर शिल्पग्राम से दक्षिणी गेट होते हुए पश्चिमी गेट पार्किंग तक प्रोेजेक्ट के काम देखे। डीजी टूरिज्म ने उन्हीं गड़बड़ियों को सुधारने के निर्देश दिए, जिनके बारे में अमर उजाला खुलासा कर चुका है।
ताजमहल के पास ताजगंज प्रोजेक्ट का शाम को निरीक्षण करने पहुंचे सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन अमृत अभिजात ने रेड सैंड स्टोन लैंप पोस्ट को कमजोर बताया। डीएम पंकज कुमार, उप निदेशक अनूप श्रीवास्तव के साथ उन्होंने लैंप पोस्ट की बुनियाद और ढांचे की मजबूती पर जोर दिया। दौरे से पहले निर्माण निगम ने खामियों को ढकने की पूरी कोशिश की, लेकिन यह हो नहीं पाया। मीडिया से रूबरू सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने कहा कि प्रोजेक्ट के काम धीमी गति से हो रहे हैं। इनकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। काम समय पर करने के लिए मजदूर बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने इंजीनियरों से प्रोजेक्ट में रेड स्टोन में एकरूपता न होने पर सवाल भी पूछे। कहा कि 300 साल बाद भी ताजमहल जैसी एकरूपता पत्थरों में नजर नहीं आ पा रही।
अमर उजाला असर-:
धांधली की नींव में लगे पत्थर बदले
पहली ही बारिश में रेड सैंड स्टोन और काबल स्टोन की रोड धंस जाने पर दोपहर में इन्हें बदल दिया गया। अमर उजाला ने जिन स्थानों पर पत्थरों के धंसने के फोटो प्रकाशित किए, उन सभी जगहों पर निर्माण निगम ने आनन-फानन में बदलवा दिया। पूर्वी गेट पर हरे रंग के पर्दे लगाकर प्रोजेक्ट में की जा रही खराब काम को छिपा लिया गया। पश्चिमी गेट और शाहजहां गार्डन की ओर डक्ट और फुटपाथ के पत्थरों को नहीं बदलवाया गया। डीजी टूरिज्म ने अमर विलास होटल के पास बनाए गए 100 मीटर के मॉडल को ही देर तक देखा।
एनओसी देने पर फंसने से डर रहे अधिकारी
हेरिटेज कारीडोर की तरह से विवादित होते जा रहे ताजगंज प्रोजेक्ट में अपनी कलम फंसाने से सभी विभागों के अधिकारी डर रहे हैं। पर्यटन विभाग ताजगंज प्रोेजेक्ट के लिए एएसआई से एनओसी के लिए डेढ़ महीने से इंतजार कर रहा है तो राज्य सरकार के अधिकारी भी एनओसी देने से कतरा रहे हैं। सरकार बदलने पर जांच और अनियमितताओं पर याचिका के डर से विभागों ने भी एनओसी नहीं दी है। वन विभाग, नेशनल मान्यूमेंट अथारिटी, जल संस्थान, जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आगरा विकास प्राधिकरण, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, टीटीजेड अथारिटी ने ताजगंज प्रोेजेक्ट को अब तक एनओसी जारी नहीं की हैं, जबकि मई और जून में ही आवेदन किए जा चुके हैं।
अपने होटलों से किनारा, फाइव स्टार का सहारा
उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम की प्रदेश भर में 80 इकाईयां हैं, जिनमें से आगरा में ताजमहल के पास ताज खेमा होटल, शिल्पग्राम, गुलिस्ता और राही टूरिस्ट बंग्ला है, लेकिन पर्यटन विभाग के मंत्री और अफसर इन होटलों की जगह पंचतारा होटलों में ही रुकते रहे हैं। रविवार को डीजी टूरिज्म अमृत अभिजात भी पंचतारा होटल में ही रुके, जबकि जिस ताजगंज प्रोजेक्ट का उन्होंने दौरा किया, उसी के सामने ही ताज खेमा होटल मौजूद है। अपने होटलों से किनारा करने के चलते पर्यटन निगम के होटल बदहाली के शिकार है। अधिकारियों के न रुकने से इन होटलों, टूरिस्ट बंग्लो की दुर्दशा सामने नहीं आ पा रही।
बस रूट से जुड़ेंगे स्मारक, हेरिटेज वॉक भी
डीजी टूरिज्म ने जल्द ही स्मारकों को बस सेवा के जरिए जोड़ने का भरोसा दिया। आगरा में कमिश्नर रहते हुए उन्होंने आगरा कैंट से स्मारकों तक एसी बस चलाई थी, लेकिन यह बंद हो गई। उन्होंने हेरिटेज वॉक को भी गंभीरता से शुरू करने के लिए निर्देश दिए।
हंगामेदार हो सकती है आज पर्यटन नीति की बैठक
प्रस्तावित पर्यटन नीति में लग्जरी टैक्स की सीमा घटाकर 500 रुपये करने पर सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे सर्किट हाउस में बैठक होनी है। पर्यटन उद्यमियों में नई नीति को लेकर जिस तरह से आक्रोश है, उसे देखते हुए बैठक हंगामेदार हो सकती है।