ताजमहल को अग्रेश्वर नाथ महादेव नागेश्वर विराजमान मंदिर बताकर इसके बंद हिस्सों को खोलने और पूजा करने की अनुमति देने की मांग को लेकर लखनऊ के अधिवक्ता हरीशंकर जैन ने निजी परिवाद दाखिल किया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन के यहां दाखिल वाद में पुरातत्व विभाग, गृह मंत्रालय और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है। न्यायालय ने सुनवाई के लिए 13 मई की तारीख नियत की है।
उन्होंने दावा किया है कि यहां लार्ड शिव का भव्य मंदिर था, जिसका नाम तेजोमहालय था। 11वीं शताब्दी में जयपुर के राजा जय सिंह ने मंदिर का निर्माण कराया था। इसे मुगल शहंशाह शाहजहां ने राजा जय सिंह से जबरिया ले लिया था। यह एक अष्टकोणीय इमारत है। कलश लगा है, तमाम हिंदू चिह्न हैं। बेसमेंट वर्षों से बंद है। लिहाजा इसके बंद हिस्से खोले जाएं और हिंदुओं को पूजा-पाठ की अनुमति मिले। नमाज बंद की जाए।
परिवाद में मुख्य वादी अग्रेश्वर नाथ महादेव नागेश्वर विराजमान हैं और उनके वाद मित्र के रूप में हरीशंकर जैन, अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री, पंकज वर्मा, सुधा शर्मा राहुल श्रीवास्तव हैं। मामले की पैरवी अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ (आगरा), अजय पांडे (लखनऊ) करेंगे।