मंगलवार दोपहर में धूल भरी आंधी के साथ शुरू हुई बारिश में ताजमहल में मौजूद पर्यटकों ने मुख्य गुंबद परिसर और रॉयल गेट के नीचे सुरक्षित जगह तलाशी। इसी दौरान रॉयल गेट के ऊपरी हिस्से में मुगलकालीन पच्चीकारी के कुछ हिस्से के पत्थर के टुकड़े ढीले होकर गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पत्थर गिरने की आवाज सुन वहां मौजूद पर्यटक दूर हट गए। ताज देखने रोजाना हजारों की संख्या में सैलानी आते हैं। रॉयल गेट के रखरखाव और पत्थरों की मजबूती को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
यहां बीते दस साल से लगातार पत्थर गिरने की घटनाएं हो रही हैं। इससे पहले रॉयल गेट को सबसे ज्यादा नुकसान 11 अप्रैल 2018 को 130 किमी. की रफ्तार से आई आंधी से हुआ था, तब रॉयल गेट के तीन छोटे गुंबद और पत्थर नीचे गिरे थे, वहीं दक्षिणी गेट की एक मीनार गिर गई थी। वर्ष 2015 में पांच मार्च को गाइडों का ब्योरा दर्ज करने वाली जगह पत्थर टूटकर गिरे थे। तीन जून को पच्चीकारी के पत्थर गिरे थे तो 19 अगस्त को ब्रिटिशकालीन लैंप गिर गया था। वर्ष 2024 में 30 मई को भी रॉयल गेट के पत्थर निकल गए थे।