कुरावली। कभी-कभी जिंदगी की सिलवटों को सीने के लिए सिर्फ सुई-धागा ही काफी नहीं होता, बल्कि हौसलों की मजबूत डोर भी चाहिए होती है। मोहल्ला घनराजपुर निवासी राजेश तिवारी ने ये बात साबित कर दी है। पेशे से एक साधारण दर्जी, लेकिन सोच में असाधारण। उन्होंने अपने संघर्षों से न सिर्फ अपने परिवार को संभाला, बल्कि दिव्यांग बेटे को देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में आईएएस अधिकारी बना दिया। राजेश तिवारी बीते 33 वर्षों से कुरावली के सदर बाजार स्थित पुरानी गल्ला मंडी में अपनी छोटी सी सिलाई की दुकान चला रहे हैं। सीमित आमदनी और बड़ी जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। चार बेटों और एक बेटी वाले राजेश को जिंदगी ने कई बार आजमाया, लेकिन उन्होंने हर बार मजबूती से जवाब दिया। राजेश तिवारी को बड़ा बेटा एक हादसे में चल बसा। उसके बाद छोटे बेटे सूरज तिवारी दिल्ली में प्राइवेट नौकरी के लिए गया, लेकिन लौटते समय दादरी में ट्रेन से गिरने के कारण उसके दोनों पैर और एक हाथ कट गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन राजेश तिवारी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बेटे सूरज का मनोबल बढ़ाया और कहा कि अगर हाथ-पैर नहीं हैं तो क्या, दिमाग और हौंसला तो है...तू पढ़ाई कर, बड़ी नौकरी पा।