मोटापा, फास्टफूड-डिब्बा बंद भोजन, धूम्रपान और कम पानी पीना भी वजह है। अगर किसी के उल्टी हो रही है, सांस फूल रही है, हाथ-पैर और चेहरे पर सूजन है। थोड़ा कार्य करने पर थकान हो जाती है। सबसे खास पेशाब करते वक्त झाग का गुच्छा बन रहा है तो किडनी में संक्रमण हो सकता है। ओपीडी में आने वाले 35 फीसदी मरीजों ने इन लक्षणों को नजरअंदाज किया। इससे उनका रोग बढ़ गया।
इन बातों का रखें ध्यान
- पैकेट बंद भोजन और पेय सामग्री, फास्ट फूड से बचें।
- धूम्रपान, शराब से दूर रहें, भोजन में नमक कम करें।
- रक्तचाप, मधुमेह और वजन को नियंत्रित करें।
- किडनी रोग नहीं है तो रोजाना 3-5 लीटर पानी पीएं।
- पैदल चलें, व्यायाम करें और हरी सब्जी, सलाद खाएं।
जीवनशैली बदली और उपचार से हुआ सुधार
वरिष्ठ रंगकर्मी और पत्रकार अनिल शुक्ला का कहना है कि 2012 में दिल्ली एम्स में मेरी किडनी 75 फीसदी खराब बताकर एक तरह से इलाज से हाथ खड़े कर दिए गए। ऐसे में बिहार के भागलपुर स्थित प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में तीन महीने भर्ती रहकर प्राकृतिक चिकित्सा (पानी, हवा, मिट्टी, तापमान और नियंत्रित आहार) अपनाई। इसके बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में एलोपैथी उपचार करा रहा हूं, इससे स्थिति में सुधार है।