फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वयंसेवक देश को ही नहीं, दुनिया को महान बनाएंगे

Tue, 06 Oct 2015 02:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वामी विवेकानंद के सपने को साकार कर रहा है। वह ऐसे आदर्श लोगों का निर्माण कर रहा है जो स्वयं समर्पित, स्वयं चरित्रवान और स्वयं देशभक्त हों। यह कहना है पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का। उनका आधा घंटे से ज्यादा का भाषण कार्यकर्ता निर्माण पर ही केंद्रित रहा। हालांकि इस दौरान वह आगरा में पार्टी को खड़ा करने में राजकुमार सामा के योगदान को नहीं भूले। उन्होंने उन जैसे ही कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करने का आह्वान किया।
विज्ञापन

लालकृष्ण आडवाणी सोमवार को लोहामंडी स्थित अग्रसेन भवन में पूर्व एमएलसी राजकुमार सामा की प्रथम पुण्यतिथि पर उनकी आत्मकथा ‘मेरी कहानी मेरी जुबानी’ के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि तौर पर मौजूद थे। आडवाणी ने राजकुमार सामा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए अपने भाषण की शुरुआत की। इसके बाद कहा कि जिस तरह से स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में भारतीय ज्ञान, धर्म, विचार, संस्कृति का पक्ष रखकर देश का गौरव बढ़ाया था, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इससे जुड़े अन्य संगठन उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर आदर्श लोगों के निर्माण का कार्य कर रहे हैं। जो देश को ही नहीं दुनिया को महान बनाएंगे। उन्होंने कहा कि आज सामा जैसे पार्टी को समर्पित, निष्ठावान कार्यकर्ताओं की जरूरत है। इससे पूर्व आडवाणी के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, सांसद चौधरी बाबूलाल, विधायक जगन प्रसाद गर्ग व योगेेंद्र उपाध्याय, ब्रजक्षेत्र प्रभारी गोपाल टंडन, ब्रजक्षेत्र अध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल, जिलाध्यक्ष अशोक राना, महानगर अध्यक्ष नागेंद्र प्रसाद दुबे गामा व कार्यक्रम के संयोजक रंजीत सामा ने राजकुमार सामा की आत्मकथा का विमोचन किया। पूरन डाबर ने राजकुमार सामा के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पूर्व सांसद प्रभु दयाल कठेरिया, विजय दत्त पालीवाल, जितेंद्र त्रिलोकानी, सुनील शर्मा, अवधेश रावत, श्याम भदौरिया, विजय शिवहरे, प्रशांत पौनिया आदि मौजूद रहे।
पहले सामा के बारे में सुना, फिर बोला
आडवाणी तय कार्यक्रम से लगभग ढाई घंटे बाद कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। ऐसे में आयोजकों ने समय को देखते हुए अन्य वक्ताओं को बोलने से रोक दिया। आडवाणी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के बाद ही आयोजकों ने स्वागत भाषण के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी को माइक पकड़ाया। उन्होंने भी ज्यादा भूमिका नहीं बनाई और संबोधन के लिए आडवाणी को आमंत्रित किया। इस पर आडवाणी ने चुटकी ली। कहा कि मुझे अन्य वक्ताओं के माध्यम से राजकुमार सामा के बारे में और जानना था। आगरा में उनके द्वारा किए गए कार्यों से रूबरू होना था, लेकिन उससे पहले ही उन्हें संबोधन के लिए बुला लिया। इसके बाद आडवाणी ने अपना स्थान ग्रहण किया। मौके की नजाकत को देखते हुए ब्रजक्षेत्र अध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल और उनके बाद प्रदेश उपाध्यक्ष हरद्वार दुबे ने राजकुमार सामा के व्यक्तित्व और उनके कृतित्व पर प्रकाश डाला। इन दोनों वक्ताओं से सामा के बारे में सुनने के बाद ही आडवाणी ने अपना भाषण शुरू किया।
विज्ञापन

 नहीं रख सके शहर की समस्याएं
अपने संबोधन से पहले आडवाणी ने वक्ताओं से अपील की थी कि वह शहर की समस्याओं पर भी प्रकाश डालें, ताकि वह दिल्ली लौटकर उन पर मंथन कर सकें और केंद्र सरकार से इनके निस्तारण का मार्ग प्रशस्त कर सकें। उन्होंने केंद्र में अपनी पार्टी की सरकार होने का हवाला देते हुए आगरा के विकास से संबंधित प्रस्ताव मांगे थे। लेकिन एक भी वक्ता ने आडवाणी के समक्ष शहर की समस्याएं नहीं रखीं।
अटल मोह छूटा नहीं, मोदी नाम लिया नहीं
जनसंघ के अपने साथी राजकुमार सामा की पुण्यतिथि पर जब संगठन और कर्मठता का जिक्र हुआ तो आडवाणी मानो बहुत कुछ कहना चाहते हों। वह घूम फिरकर स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्धरण पर अटक जाते। फिर कुछ सोचते और कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाने लगते। 30 मिनट के भाषण में वह तीन बार कुछ सेकेंड के लिए चुप्पी साध गए। संगठन, चुनाव, कार्यकर्ता, संघर्ष, ज्ञान तमाम विषयों पर उन्होंने अलग-अलग शख्सियतों के नाम लिए, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी नाम कहीं भी नहीं आया। हालांकि इस दौरान वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पार्टी और अपने जीवन में योगदान की प्रशंसा करना नहीं भूले।  
हिंदी फिल्मों से सीखी हिंदी
बात जब पूर्व में किए गए संघर्ष की हो रही थी तो आडवाणी ने खुद से जुड़ी कुछ बातों से भी पर्दा उठाया। बताया कि वह कराची में पैदा हुए, यहीं पर क्रिश्चियन स्कूल में बढ़े। उन्होंने कहा कि तब तक उन्हें हिंदी नहीं आती थी। तब वह सिर्फ अंगरेजी और सिंधी भाषा ही जानते थे। रामायण, महाभारत, गीता भी उन्होंने सिंधी में ही पढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी फिल्मों से ही उन्होंने हिंदी सीखी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख और अटल बिहारी वाजपेयी का अपने जीवन में काफी योगदान बताया।  
अटल की स्थिति ठीक नहीं
कार्यक्रम में मौजूद एक कार्यकर्ता ने आडवाणी से अटल का हाल पूछा तो पहले तो उनके चेहरे के भाव बदल गए। फिर कुछ पल बाद बोले कि अटल जी की स्थिति ठीक नहीं है। वह चलने फिरने और बोलने में असमर्थ हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें