शहर की कामकाजी महिलाएं तनाव में हैं। दफ्तर के काम और घर की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बिठाने की जद्दोजहद उनको अवसाद, मोटापे जैसी बीमारियां दे रही है। हालात का ये आकलन एक सर्वे में सामने आया है। अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर के तीन महीनों में ये सर्वे आगरा सहित देश के 10 शहरों में किया गया। जनवरी में इसका डाटा एकत्रित किया गया।
सर्वे करने वाली वेदा लाइफ रिसर्च संस्था के निदेशक डॉ. प्रणव प्रकाश ने बताया कि आगरा में कामकाजी महिलाओं में ओवरटाइम का औसत राष्ट्रीय औसत 32 फीसदी से दोगुना 72 फीसद है।
हर चार में से एक कामकाजी महिला घर में पति से विवाद और पारिवारिक समस्या से जूझ रही है। 30 से 45 साल की उम्र में मोटापा, त्वचा संबंधी समस्या, मधुमेह, थायरॉइड के साथ पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की शिकार हो रही हैं। इससे गर्भधारण में भी समस्या आ रही है।