मध्य कमान के 22 छावनी परिषदों के विद्यालयों के विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रतियोगिता ‘तरंग 2016’ का आगाज सोमवार को सूरसदन प्रेक्षागृह में हुआ। पहले दिन जूनियर और सीनियर वर्ग के 850 छात्र-छात्राओं ने ब्रज की होली से लेकर देशभक्ति के नगमों पर प्रस्तुतियां देकर संस्कृति की इंद्रधनुषी छटा बिखेरी।
मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डा. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि देश की संपत्ति बैंकों में नहीं, स्कूलों में है। भारत का स्वर्णिम भविष्य इन विद्यार्थियों पर निर्भर करता है। छावनी परिषद के अध्यक्ष ब्रिगेडियर प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि आगरा एक शहर नहीं बल्कि देश की संस्कृति का झरोखा है। इसके पूर्व डा. कठेरिया ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप जलाकर शुभारंभ किया। बच्चों ने दास्तान ए ताज, ब्रज की होली की रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। भारत वंदना हो या तांडव करते शिव का नृत्य, बच्चों की धमाकेदार प्रस्तुतियों से सूरसदन सुबह से शाम तक तालियों से गूंजता रहा। भारत हमको जान से प्यारा है...सबसे प्यारा ये गुलिस्तां हमारा है, भारती मां भारती जैसे देशभक्ति के नगमों पर प्रस्तुतियां दी गईं। राष्ट्रगान के साथ पहले दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन हुआ। संचालन सुशील सरित और श्रुति सिन्हा ने किया। मध्य कमान के डायरेक्टर एसएन गुप्ता, शोभा गुप्ता, ज्वाइंट डायरेक्टर भावना सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी अमित मिश्रा, छावनी उपाध्यक्ष डा. पंकज महेंद्र, डा. रामबाबू हरित, दिलीप कनौजिया, दुर्गेश उपाध्याय, रेनू महेंद्रू, नीलेंद्र श्रीवास्तव, आसमा अली, मुकुल सक्सेना आदि मौजूद रहे। छावनी परिषद के सीईओ एम. वेंकट नरसिम्हा रेड्डी ने व्यवस्थाओं का निर्देशन किया।
चिराग के बच्चों ने दी प्रस्तुति
चिराग स्कूल के स्पेशल बच्चों ने खो न जाएं ये तारे जमीं पर गीत पर समूह नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। मध्य कमान की प्रधान निदेशक दीपा बाजवा ने बच्चों को पुरस्कृत करके हौसला बढ़ाया। स्कूल की प्रिंसीपल भावना सिंह को भी पुरस्कृत किया। दूसरी ओर, पहले दिन एकल नृत्य, समूह गीत, एकल गायन व एकल अभिनय की प्रतियोगिताएं हुईं। निर्णायक मंडल के सदस्यों ने अपने निर्णय सुरक्षित कर लिए।