आगरा के सूर सरोवर पक्षी विहार, कीठम का क्षेत्रफल 403.09 हेक्टेयर से बढ़ाकर 798.15 हेक्टेयर करने की अंतिम अधिसूचना अगले साल मई तक जारी करनी होगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार के चीफ कंजरवेटर के हलफनामे में दी गई समय सीमा स्वीकार कर ली है, लेकिन हर तीन माह में राज्य सरकार के वन विभाग से प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
आगरा के पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की याचिका पर राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में अपना रुख बदल लिया। पूर्व में लगी फटकार के बाद राज्य सरकार के चीफ कंजरवेटर एन रवींद्र की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे में बताया गया कि सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्रफल 403.09 हेक्टेयर था, जिसमें सूरदास वन ब्लॉक का 380.558 हेक्टेयर हिस्सा जोड़ने की अधिसूचना जारी कर दी गई है।
अब इसमें 14.5025 हेक्टेयर का तीसरा हिस्सा जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। धारा 21 जारी करने के बाद जमीन अधिग्रहण और नामांतरण की प्रक्रियाएं की जाएंगी, जिसमें अगले साल फरवरी तक का का समय लग जाएगा, जिससे अंतिम अधिसूचना मई 2026 में जारी की जा सकेगी।
1020 हेक्टेयर में है इको सेंसिटिव जोन
दिसंबर में राज्य सरकार ने सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्रफल बढ़ाने की अधिसूचना में इको सेंसिटिव जोन शून्य कर दिया था। 403.09 हेक्टेयर के पुराने क्षेत्रफल में इको सेंसिटिव जोन 1 किमी तक था। तब इको सेंसिटिव जोन कुल 1020.25 हेक्टेयर तक था, लेकिन इसे शून्य कर देने पर पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने एनजीटी में आपत्ति दर्ज कराई थी। बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया कि नए सिरे से सूर सरोवर पक्षी विहार का इको सेंसिटिव जोन तब तय किया जाएगा, जब 14.5025 हेक्टेयर के तीसरे हिस्से को पक्षी विहार से जोड़ने की अधिसूचना जारी की जाएगी।
सीमा विस्तार के तीन चरण
403.09 हेक्टेयर है पूर्व क्षेत्रफल
380.558 हेक्टेयर का वन ब्लॉक दिसंबर में जुड़ा
14.5025 हेक्टेयर वन मई 2026 तक जोड़ा जाएगा
वन क्षेत्र में 395 हेक्टेयर की होगी बढ़ोतरी
सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्रफल 403.09 हेक्टेयर से बढ़कर 798.15 हेक्टेयर हो जाने से संरक्षित वन क्षेत्र 395 हेक्टेयर बढ़ जाएगा। सूर सरोवर पक्षी विहार से सटे सूरदास वन ब्लॉक को वन विभाग ने देसी प्रजाति के पेड़ों से तैयार किया है। सूर सरोवर में जहां विलायती बबूल लगा है, वहीं सूरदास वन ब्लाॅक में चौड़ी पत्तियों वाले देसी प्रजाति के पेड़ लगे हैं। सेंक्चुअरी का क्षेत्रफल बढ़ने से यहां इको टूरिज्म में रुचि रखने वाल पर्यटकों की संख्या बढ़ने के आसार हैं।