सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश अरुण मिश्रा व न्यायाधीश एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने छावनी क्षेत्र में यमुना किनारे कूड़ा निस्तारण को लेकर संयुक्त निरीक्षण के आदेश केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व जिलाधिकारी मथुरा को दिए हैं। इसकी रिपोर्ट अगले छह सप्ताह के दौरान न्यायालय में प्रेषित करनी होगी। वहीं, न्यायालय ने जुर्माने की आधी राशि जमा करने को कहा है।
दरअसल, शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की याचिका पर सुनवाई की। इस मामले में पहले तपेश भारद्वाज की याचिका पर एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर पांच लाख रुपये का जुर्माना तय कर दिया था।
वहीं, छावनी परिषद पर भी 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जिसे छावनी बोर्ड ने जमा कर दिया गया है। लेकिन उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।