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यमुना प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने किया डीएम मथुरा से जवाब तलब, दिया यह आदेश

Sat, 28 Sep 2019 12:55 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश अरुण मिश्रा व न्यायाधीश एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने छावनी क्षेत्र में यमुना किनारे कूड़ा निस्तारण को लेकर संयुक्त निरीक्षण के आदेश केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व जिलाधिकारी मथुरा को दिए हैं। इसकी रिपोर्ट अगले छह सप्ताह के दौरान न्यायालय में प्रेषित करनी होगी। वहीं, न्यायालय ने जुर्माने की आधी राशि जमा करने को कहा है। 
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दरअसल, शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की याचिका पर सुनवाई की। इस मामले में पहले तपेश भारद्वाज की याचिका पर एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर पांच लाख रुपये का जुर्माना तय कर दिया था। 

वहीं, छावनी परिषद पर भी 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जिसे छावनी बोर्ड ने जमा कर दिया गया है। लेकिन उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या एनजीटी के आदेश का पालन हुआ ?

इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा है कि क्या एनजीटी के आदेश का पालन हुआ है? क्या छावनी परिषद ने यमुना किनारे डंपिंग ग्राउंड की बाउंड्रीवॉल की है? क्या उस एरिया में ग्रीन बेल्ट विकसित की गई है? 

इस पर प्रदूषण बोर्ड के अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा ने कुछ दस्तावेज प्रस्तुत किए। याचिकाकर्ता तपेश भारद्वाज के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी, राहुल कुमार, रोहित पांडे ने न्यायालय में दलील दी कि बोर्ड ने इस मामले में उचित समय पर संज्ञान नहीं लिया। अब भी लापरवाही वाला रवैया अपनाया हुआ है। 

इस पर न्यायालय ने हिदायत देते हुए कहा कि जुर्माने की आधी राशि जमा कर दें। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता ने अगली तारीख तक जुर्माने की राशि को जमा करने की छूट मांगी। मामले की अगली सुनवाई नवंबर के आखिरी सप्ताह में होना तय हुआ है ।
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