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UP: पैदल चलने वालों को मिलेगी बड़ी राहत..सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, अब राज्य सरकारों को करनी होगी ये व्यवस्था

Thu, 15 May 2025 03:22 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

पैदल चलने वालों को अब कोई दिक्कत नहीं होगी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया है। जिसमें देशभर में फुटपाथ को दुरुस्त करने के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं करने के लिए कहा है।
 
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फुटपाथ (सांकेतिक) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने अपने एक आदेश में कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो महीने के भीतर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके शहरों और गांवों में पैदल चलने वालों के लिए साफ, अतिक्रमण मुक्त और दिव्यांगों के अनुकूल फुटपाथ हों। सभी सार्वजनिक सड़कों पर उपयुक्त फुटपाथ बनाए जाएं। फुटपाथों से अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है।
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फुटपाथों को इस तरह से बनाए रखा जाए कि दिव्यांगजन भी आसानी से उनका उपयोग कर सकें। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश, इस संबंध में नीति बनाकर दो महीने में रिपोर्ट दाखिल करें, भारत सरकार भी यह बताए कि पैदल यात्रियों के अधिकारों की रक्षा के लिए उसके पास क्या नीति है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हाईकोर्ट की ओर से पहले से जारी दिशा-निर्देशों को आदर्श मानते हुए राज्यों को अपनाने को कहा। न्यायालय का मत था कि जब फुटपाथ नहीं होते, तो गरीब, बुजुर्ग, बच्चे और दिव्यांगजन मजबूर होकर सड़क पर चलते हैं। हादसों का शिकार हो जाते हैं। यह केवल यातायात का मुद्दा नहीं, यह जीवन का अधिकार है। यह निर्णय उन लाखों भारतीयों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो आज भी फुटपाथ के अभाव में जान जोखिम में डालकर सड़क पर चलते हैं। अब हर कदम सुरक्षित होगा, हर जीवन की अहमियत होगी।

युवा उद्यमी और सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत जैन ने इस मामले में याचिका दाखिल की। पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से बहस वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने की। जिसमें देशभर में फुटपाथों की दुर्दशा, अतिक्रमण और दिव्यांगों के लिए उनकी अनुपलब्धता की ओर ध्यान दिलाया गया था। याचिका में बताया गया कि वर्ष 2022 में 77,004 पैदल यात्रियों के साथ दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें से 32,797 की मृत्यु हुई, 34,055 गंभीर रूप से घायल हुए, 30,809 को मामूली चोटें आईं।

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चुप्पी को मिली सांवैधानिक आवाज
यह सिर्फ एक याचिका नहीं थी, यह उन करोड़ों पैदल चलने वालों की आवाज थी, जिन्हें कभी सुना नहीं गया। मैंने यह दर्द नजदीक से देखा है। यह फैसला उन सभी के नाम है, जिन्होंने चुपचाप हादसों को सहा, और अब उनकी चुप्पी को एक सांवैधानिक आवाज मिल गई है। - हेमंत जैन, याची

याचिका में दिए तथ्य व आंकड़ेः
वर्ष    कुल सड़क हादसों में मृतक            पैदल यात्री             मृतक प्रतिशत

2016   1,50,785                                     15,746             10.44 प्रतिशत
2017   1,47,913                                     20,457             13.83 प्रतिशत
2018   1,51,417                                     22,656             14.96 प्रतिशत
2019   1,51,113                                     25,858             17.11 प्रतिशत
2020   1,31,714                                     23,483             17.83 प्रतिशत
2021   1,53,972                                     29,124             18.9 प्रतिशत
2022   1,68,491                                     32,825             19.5 प्रतिशत

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