कासगंज। मां की बदौलत ही घर आंगन में बच्चे की किलकारियां गूंजती है। बच्चे की किलकारियां सुनने के लिए यह बेहद जरूरी है कि गर्भ के समय मां हृष्टपुष्ट रहे। लोगों में जागरूकता की कमी के चलते गर्भ के समय आवश्यक पोषक तत्व देने की ओर ध्यान नहीं दिया जाता, जो मां व बच्चे दोनों के लिए ही खतरनाक हो सकता है।जिले में गर्भवती महिलाओं की सेहत को परिवारीजन नजर अंदाज कर रहे हैं। उनके खानपान से पोषक तत्व घट रहे हैं। महिला डॉक्टर गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच कराती हैं तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। अधिकांश महिलाओं में रक्त अल्पता की शिकायत आ रही है। गर्भवती के शरीर में रक्त का स्तर 11 से 12 ग्राम तक होना चाहिए। महिला चिकित्सक बताती हैं कि गर्भवती महिलाएं खान-पान पर ध्यान नहीं देती। मानक के अनुसार रक्त का स्तर किसी भी महिला में नहीं निकल रहा। काफी संख्या में तो महिलाएं ऐसी भी आती हैं जिनमें रक्त का स्तर आधा तक निकल रहा है। यह स्थिति गंभीर चिंताजनक है।
अप्रैल और मई माह में जांच -6543
10 ग्राम से कम रक्त- 6211
सात ग्राम से कम रक्त -130
गर्भ के समय इन पोषक तत्वों की जरूरत
- आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण
गर्भवती भोजन में लें ये पोषक तत्व
हरी सब्जी 250 ग्राम
चुकंदर 100 ग्राम
अनार 100 ग्राम
मौसमी 1 किलो
दूध 500 ग्राम
गुड़ 50 ग्राम
प्रसव के समय होने वाली दिक्कतें
- महिला को हो सकता है अधिक रक्त स्राव
- प्रसव के समय महिला की जान को हो सकता है खतरा
- बच्चा हो सकता है कमजोर, जान भी पड़ सकती है खतरे में
आंगनबाड़ी केंद्र भी नहीं कर पा रहे पोषण
कासगंज। जनपद में संचालित आंगनबाड़ी केंद्राें पर गर्भवती महिलाओं का पूरा विवरण संग्रहीत कराया जाता है। ताकि महिलाओं को पोषाहार दिया जा सके, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र महिलाओं का पोषण करने में सफल नहीं हो रहे। सरकार से मिलने वाला पोषाहार उनके पास तक नहीं पहुंचता। गंजडुंडवारा से जिला अस्पताल आने वाली समरीन का पहला बच्चा ऑपरेशन से हो चुका है। वह दूसरी बार गर्भवती होने पर जांच के लिए आई तो उनको रक्त का स्तर मात्र पांच ग्राम निकला।
सोरों निवासी शशि तीसरी बार गर्भवती होने पर जिला अस्पताल में प्रसव पूर्व जांच कराने के लिए पहुंची। चिकित्सक ने उनके रक्त की जांच कराई तो उनमें रक्त का स्तर छह ग्राम पाया गया। संवाद
गर्भवती को तीसरे माह के बाद आयरन की गोली लगातार खानी चाहिए। पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में दिए जाने चाहिए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। रक्त अल्पता की स्थिति काफी खतरनाक होती है। जितना रक्त का स्तर कम होगा उतना ही खतरा अधिक होता है- डॉ. नबीला अब्बास, डीजीओ, जिला अस्पताल