त्योहारी सीजन से ठीक पहले शहर में चीनी का संकट खड़ा हो गया है। शुगर मिल मालिकों की मनमानी और एजेंट्स की जमाखोरी के चलते थोक बाजार में सात दिन से सप्लाई ठप है। रोजाना करीब तीन हजार कुंतल चीनी की खपत है।। मंगलवार तक थोक विक्रेताओं के पास बमुश्किल चार से पांच हजार कुंतल का स्टॉक ही बचा है। शुक्रवार तक यदि नई खेप नहीं पहुंची तो रसोई से मिठाई और पेठा उद्योग पर बुरा असर पड़ सकता है।
आगरा खंडसारी एंड शुगर डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गिर्राज अग्रवाल के मुताबिक चीनी मिलें माल चुनिंदा एजेंट्स के जरिये बेच रही हैं। मिलों के मासिक रिलीज कोटे की शासन व प्रशासनिक जांच न होने के कारण यह सिंडिकेट बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी पैदा कर रहा है। नूरी गेट के व्यापारी विनोद अग्रवाल ने बताया कि महाराष्ट्र से भी आपूर्ति चेन बिगड़ी हुई है। पिछले सप्ताह महाराष्ट्र से चीनी की गाड़ी मंगाई थी जो अब तक नहीं मिल सकी है।
सरकार का रेट 45, बाजार में 62 रुपये किलो
सरकार ने चीनी मिलों के लिए 45 से 46 रुपये प्रति किलो का भाव तय किया था लेकिन बाजार में यह बेतहाशा मनमाने दामों पर बेची जा रही है। डबल रिफाइंड सफेद चीनी का थोक भाव 59 से 60 रुपये प्रति किलो है जो बाजार में 62 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। सिंगल रिफाइंड चीनी 57 रुपये प्रति किलो और सरकारी मिलों की हल्की गुणवत्ता वाली चीनी के 52 से 55 रुपये प्रति किलो थोक भाव है।
फैक्ट्रियों में पेठा उत्पादन प्रभावित
चीनी की किल्लत का सीधा असर शहर के 2000 से अधिक हलवाई और मिठाई विक्रेताओं पर पड़ा है। पेठा कारोबारी अमित गोयल का कहना है कि चीनी उपलब्ध न होने से फैक्ट्रियों में पेठा उत्पादन ठप होने लगा है। स्वीट्स एंड नमकीन एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार भगत ने कहा कि यदि त्योहार से पहले पर्याप्त आवक नहीं बढ़ी तो कारोबार पूरी तरह प्रभावित होगा।