कासगंज। कोरोना काल में प्रभावित हुए तमाम उद्योग भले ही धीरे-धीरे पटरी पर आ रहे हों, लेकिन चीनी उद्योग अभी भी बेपटरी है। कोरोना काल के शुरुआती दौर से प्रभावित इस उद्योग से जुड़े कारोबारियों में चिंता है। बाजारों में चीनी की मांग कम है, न्यौली मिल से लक्ष्य के अनुरूप उत्पादन का उठान नहीं हो पा रहा। इससे किसानों के बकाया भुगतान में भी देरी हो रही है।
जिले में चीनी उत्पादन की इकाई न्यौली मिल ने इस पेराई सत्र में मांग के अनुरूप चीनी तैयार की थी। अब बाजारों में उत्पाद की मांग कम हो गई है। कोरोना संक्रमण काल में लगे कर्फ्यू से शादी-विवाह सहित अन्य समारोह छोटे स्तर पर आयोजित हुए। अब चातुर्मास लगने के कारण शादी विवाह के कार्यक्रम बंद हो गए हैं।
ऐसी स्थिति में चीनी की मांग लगातार कम हो रही है। न्यौली मिल की चीनी की सबसे अधिक खपत आगरा के पेठा उद्योग में होती है, लेकिन आगरा का पेठा कारोबार भी प्रभावित है। ऐसे में गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान मिल पर शेष है।
दामों में भी आई गिरावट
चीनी की मांग कम होने के कारण प्रति क्विंटल भावों में भी गिरावट आई है। पिछले दो महीने के सापेक्ष चीनी के थोक भाव में 125 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है। दो महीने पहले चीनी के भाव 3600 रुपये प्रति क्विंटल थे, अब 3475 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं।
यह कहते हैं आंकड़े
- 1.85 लाख क्विंटल चीनी इस सत्र में मिल ने तैयार तैयार की है।
- 10 हजार क्विंटल चीनी औषतन बिक्री होती थी न्यौली मिल से।
- 3 हजार क्विंटल चीनी का ही पिछले चार महीनों में ही हो पाया है उठान।
न्यौली चीनी मिल लक्ष्य के अनुसार चीनी बिक्री नहीं कर पा रही है। इसके पीछे कारण है कि थोक व्यापारियों ने चीनी की मांग कम कर दी है। चीनी मिल के अफसरों को बताया है कि वे हर हाल में जल्द से जल्द चीनी बिक्री कर गन्ना किसानों का भुगतान सुनिश्चित करें। - ओम प्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी