हड़ताल पर बैठे विवि के शिक्षक और कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में स्थिति और बिगड़ गई है। आवासीय शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षक भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। शनिवार को विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर के साथ खंदारी परिसर में भी पठन-पाठन बंद रहा।
कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों पर 25 अक्तूबर को हुए पथराव के विरोध में विश्वविद्यालय के कर्मचारी 26 अक्तूबर से हड़ताल पर हैं। कार्यालयों का ताला नहीं खोला गया है। छात्र-छात्राओं का एक भी काम नहीं हो रहा है।
26 अक्तूबर से ही पालीवाल पार्क परिसर स्थित कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ, समाज विज्ञान संस्थान, इतिहास एवं संस्कृति विभाग, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में कक्षाएं नहीं लग रही हैं। खंदारी परिसर में कक्षाएं संचालित की जा रही थीं।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
शनिवार को शिक्षक भी हड़ताल में शामिल हो गए। मांग एक ही है, दोषियों को गिरफ्तार करके कार्रवाई की जाए। धरने में आवासीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. शरदचंद्र उपाध्याय, महामंत्री डॉ. डीपी सिंह, डॉ. ब्रजेश रावत, डॉ. बिंदुशेखर शर्मा, डॉ. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा, डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. संतोष बिहारी शर्मा, डॉ. आलोक आदि शामिल रहे। शिक्षकों का भी कहना है कि दोषियों की गिरफ्तारी होने तक हड़ताल जारी रखी जाएगी।
अधिकारियों के कार्यालयों पर भी ताला
शिक्षक और कर्मचारी सामने आकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारी भी परोक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं। शनिवार को भी कोई अधिकारी कार्यालय नहीं पहुंचा। कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय के गेट पर ताला लगा रहा।
चीफ प्रॉक्टर भी धरने पर बैठे
आगरा। शिक्षकों के साथ चीफ प्रॉक्टर प्रो. मनोज श्रीवास्तव भी धरने में शामिल हुए। पथराव में उन्हें भी चोटें आई थीं। उनका कहना है कि घटना के नौ दिन बाद भी दोषियों को गिरफ्तार न किया जाना निराशाजनक है।
बढ़ती जा रही छात्रों की मुसीबत
उधर, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं माइग्रेशन के लिए विश्वविद्यालय की दौड़ लगा रहे हैं। उनको दूसरे शिक्षण संस्थानों में इसको लगाना है। डिग्री और मार्कशीट न उपलब्ध होने पर छात्र-छात्राओं की ओर से शपथ पत्र लगाया जा रहा है, माइग्रेशन फिर भी मांगा जा रहा है।
विश्वविद्यालय में कामकाज न होने से छात्र-छात्राएं परेशान हैं, उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय के अधिकारी भी हड़ताल खत्म कराने के लिए प्रयास नहीं कर रहे हैं। वह भी हड़ताल को एक तरीके से समर्थन दे रहे हैं।