फर्जी मार्कशीट के लिए कुख्यात डा. बीआरए विश्वविद्यालय की लापरवाही छात्रों पर भारी पड़ सकती है। खुले में पड़ी छात्रों की मार्कशीट का कोई भी दुरुपयोग कर सकता है। यहां से रोजाना छात्र, बाहरी तत्वों का आवागमन लगा रहता है। सबसे चिंता की बात इसमें छात्राओं के फोटो लगे प्रार्थना पत्र भी हैं। इंटरनेट या फिर अन्य जरिए से इनका गलत इस्तेमाल होने की आशंका है।
लापरवाही एक
छात्रों पर आर्थिक मार भी
डिग्री के लिए आवेदन करने वाले अधिकांश छात्रों के फार्म नहीं मिलते। ऐसे में छात्रों को मजबूरन दोबारा आवेदन करना होता है। समय पर डिग्री न मिलने पर जॉब में दिक्कत तो आती ही है, आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। नए सिरे से 150 रुपये का शुल्क बैंक में जमाकर आवेदन करना होता है। ऐसे ही पीड़ित एसएन मेडिकल कालेज के 2011 के पास आउट डा. अभिनव गुप्ता ने बताया कि साल भर पहले डिग्री के लिए आवेदन किया था। कर्मचारियों ने आवेदन गुम होने की बात कही। ऐसे में अक्तूबर को पुन: आवेदन किया।
कचरे में इनके मिले आवेदन
केस-एक:
अर्जुन दिवाकर पुत्र महेश चंद्र
वीके जैन कालेज ऑफ एजुकेशन, कासगंज
रोल नंबर: 6200010
बीएड 2006
डिग्री को आवेदन करने की तिथि: 26 नवंबर, 2015
केस-दो:
मोहम्मद आजम पुत्र मोहम्मद असलम
एसआरके कालेज फीरोजाबाद
एमकॉम -2005
रोल नंबर:212059
नामांकन संख्या: ए-3641
डिग्री के लिए आवेदन की तिथि: सात अक्तूबर,2015
लापरवाही दो:
हो सकता है मार्कशीट का दुरुपयोग
कूड़े के ढेर में तब्दील मार्कशीट में बीए, बीएससी, बीकाम, बीएड की हैं। सेकेंड तो कोई फर्स्ट डिवीजन से पास है। खुले में पड़ी इन मार्कशीटों को उठाकर कोई भी दुरुपयोग कर सकता है। इससे संबंधित छात्र के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है।
कचरे में इनकी मिली मार्कशीट
केस-1:
ध्रुवेश कुमार पुत्र सुखवीर सिंह
सरस्वती डिग्री कालेज, हाथरस
रोल नंबर:1203700612024
नामांकन संख्या: ए-956441
बीएससी फाइनल सेकंड डिवीजन से पास
केस-2:
यशवंत सिंह पुत्र जर्नादन सिंह
केआर पीजी कालेज मथुरा
रोल नंबर: 10018060121
नामांकन संख्या: 0728952
बीएससी 2009-10