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Agra University: परीक्षा और परिणाम के बाद अब डिग्री का बढ़ा बोझ, 30 हजार से अधिक आवेदन लंबित; छात्र परेशान

Sun, 22 Jun 2025 12:58 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

छात्रों को डिग्री का इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन आवेदन के बाद मार्कशीट को परीक्षा विभाग में भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में लंबा समय लगता है।
 
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आगरा विश्वविद्यालय। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय पर परीक्षा और परीक्षाफल घोषित होने के बाद डिग्री का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन आवेदन होने के बाद भी डिग्री के लिए छात्रों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अब तक 30 हजार से अधिक पुराने कोर्स की डिग्री लंबित है।
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नए सत्र को नियमित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन तेजी से परीक्षाफल घोषित कर रहा है। हालांकि परीक्षाफल में गड़बड़ी भी सामने आ रही हैं। अब डिग्री की समस्या भी खड़ी होने जा रही है। हर वर्ष मुख्य परीक्षा के साथ आवासीय संस्थानों के विद्यार्थियों की परीक्षा संपन्न कराई जाती है। इसके साथ डिग्री लेने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है।

 

विश्वविद्यालय की तरफ से डिग्री प्रिंट कर कॉलेजों में भेजी जा रही है। इसके बाद भी छात्रों को डिग्री का इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन आवेदन के बाद मार्कशीट को परीक्षा विभाग में भेजा जाता है। यहां से हर वर्ष के हिसाब से जांच की जाती है। इस कार्य में लंबा समय लगता है।

इसके बाद डिग्री का रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज होता है। तब जाकर प्रिंट होने का नंबर आता है। इसके बाद डिग्री पर हस्ताक्षर कराने में समय लगता है। ऐसे में एक माह से अधिक का इंतजार छात्रों को करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी पुराने कोर्स के मामलों में आ रही है हालांकि इनका रिकॉर्ड भी ऑनलाइन कर दिया गया है फिर भी आसानी से नहीं मिलता है। उसी का नतीजा है कि आवासीय संस्थानों के कोर्स की डिग्री सबसे अधिक लंबित है।

 
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छोटी गलती भी बन जाती है बड़ी परेशानी
मार्कशीट में छात्र या उसके पिता के नाम में छोटी सी गलती डिग्री की राह में बड़ी परेशानी बन जाती है। इस समस्या से काफी विद्यार्थी परेशान हैं, जिसका समाधान आसानी से नहीं होता है। अलीगढ़ के छात्र अभिषेक के पिता के नाम में प्रथम और द्वितीय वर्ष की मार्कशीट में मामूली अंतर था। इस वजह से उनकी डिग्री रोक दी गई। उनको दोबारा से नए सिरे से मार्कशीट तैयार करानी पड़ी। कई छात्र अपने नाम के पीछे कुमार लगा देते हैं। जबकि हाईस्कूल की मार्कशीट में कुमार नहीं लिखा होता है। इस कारण भी डिग्री आसानी से नहीं बनती है।

छात्र नेता  गौरव शर्मा ने बताया कि हेल्प डेस्क पर छात्रों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं होता है। यहां पर समस्या नोट करने के बाद आगे विभागों में अटक जाती है। विवि के अधिकारियों का इस पर कोई ध्यान नहीं 

परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद डिग्री को प्रिंट कराने का प्रयास किया जा रहा है। यह डिग्री कॉलेजों में भेजी जा रही है, जिससे छात्रों को कोई दिक्कत न हो। पुरानी डिग्री के कार्य को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
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