मैनपुरी। कोरोना महामारी के बीच कामकाज प्रभावित होने से लोगों ने आर्थिक संकट झेला। प्राइवेट स्कूलों की फीस देने के लिए रुपये नहीं हुए तो बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला करा दिया। मौजूदा शिक्षा सत्र में जिले के परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में 22 हजार छात्रों की संख्या बढ़ी है।
कोरोना महामारी के दौरान देश और प्रदेश में फैक्ट्रियां और कारखाने बंद हो गए। हजारों लोगों की नौकरी चली गईं। महानगरों से लोग अपने घरों में पहुंचे तो उनके सामने बच्चों की पढ़ाई का संकट खड़ा हो गया। कान्वेंट और निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा पाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में गांव शहर संचालित परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूल उनके बच्चों की पढ़ाई का केंद्र बने। बेसिक शिक्षा विभाग में दर्ज रिकार्ड के अनुसार शिक्षा सत्र 2020-21 में जिले के परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्र संख्या एक लाख 65 हजार थी। शिक्षा सत्र 2021-22 में यह संख्या बढ़कर एक लाख 87 हजार पहुंच गई है। बीएसए कमल सिंह ने बताया कि उनका प्रयास है कि परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा प्रदान की जाए।
समूह बनाकर दिलाई बच्चों को शिक्षा
कोरोना महामारी के दौरान परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्र-छात्राओं को व्हाटसएप ग्रुपों के माध्यम से शिक्षा प्रदान की गई। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय स्कूलों के बच्चों को भी ऑनलाइन शिक्षा प्रदान की गई। अब परिषदीय स्कूलों में बेहतर पढ़ाई हो रही है। बच्चे किसी प्रकार से पीछे नहीं हैं।
धीरेंद्र प्रताप सिंह, जिला समन्वयक (प्रशिक्षण), बेसिक शिक्षा विभाग
तकनीकी शिक्षा से जुड़े स्कूलों के बच्चे
शासन ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए तकनीकी शिक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर रिसोर्स पर्सन की तैनाती की गई है। यह रिसोर्स पर्सन छात्र-छात्राओं के लिए तकनीकी शिक्षा के संबंध में प्रशिक्षण देते हैं। कोरोना महामारी के दौरान गूगल मीट के माध्यम से रिसोर्स पर्सन द्वारा शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया।
सुखेंद्र प्रताप सिंह, समूह सदस्य, राज्य संदर्भदाता
परिषदीय स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। यहां नि:शुल्क शिक्षा व्यवस्था है।अभिभावक अपने पाल्य का नजदीकी परिषदीय स्कूल में पहुंचकर प्रवेश कराएं। यहां उनके पाल्य को बेहतर शिक्षा प्रदान की जाएगी। समय-समय पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। ऑनलाइन प्रशिक्षण के साथ ही नियमित निरीक्षण की भी व्यवस्था है।
नरेंद्र पाल सिंह, उप शिक्षा निदेशक, डायट
परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। कई स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज का शुभारंभ किया गया है। प्रशिक्षित शिक्षकों की मदद से परिषदीय स्कूलों के बच्चों को कान्वेंट स्कूल की तरफ शिक्षा दिलाई जा रही है। अभिभावक अपने छह से 14 साल के बच्चों का यहां नामांकन कराएं।
सुमित कुमार वर्मा, बीईओ, मैनपुरी