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Agra News: बाह के छात्र ने दिल्ली में फंदे पर लटककर दी जान

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बाह: दिल्ली में फंदे पर झूल कर छात्र अंश कुमार ने दी जान, बुझा घर का चिराग
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बाह। दिल्ली के मुखर्जी नगर में कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) की तैयारी के लिए कोचिंग कर रहे बाह के अंश कुमार (18) ने 7 सितंबर की रात फंदे पर लटक कर जान दे दी। फंदे पर लटकने से पहले उसने फोन पर अपने माता-पिता से बात की थी।
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कनारी खिल्ली (हाल निवासी कैंजरा रोड बाह) के सियाराम सिंह मध्य प्रदेश पुलिस में अंबाह थाने में तैनात हैं। तीन भाई-बहनों में अंश कुमार सबसे छोटा था। परिजन ने बताया कि अंश कुमार 9 महीने से दिल्ली के मुखर्जी नगर में सीजीएल की तैयारी कर रहा था। पहले हॉस्टल में रहता था। एक महीने से अलग कमरा लेकर रह रहा था। उसने 7 सितंबर की रात 9 बजे के करीब अपने बीमार पिता सियाराम सिंह एवं मां रीना देवी से फोन पर बात की थी। रीना देवी ने सियाराम सिंह की बीमारी को लेकर चिंता जताई, तो अंश कुमार ने 2-3 दिन में घर लौट कर पिता को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के लिए कहा था। बातचीत में बिल्कुल भी परेशान नहीं दिख रहा था। दिल्ली में ही रह रहे चाचा प्रहलाद सिंह के पास जाकर उसने खाना खाया था। उसके बाद उसने फंदे पर लटक कर जान दे दी। मकान मालिक ने अंश कुमार के आत्मघाती कदम की जानकारी दी, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।


बहनें बोलीं- अब किसको करेंगी टीका
- मौत को गले लगाने वाले अंश कुमार रक्षाबंधन पर घर आया था। दोनों बड़ी बहनों शिल्पी, मुस्कान ने अंश कुमार की कलाई पर राखी बांधी थी। घर पर छोटे भाई का शव देख कर दोनों बहनें बिलख पड़ीं। बोली- अब किसकी कलाई पर राखी बांधेंगी? वहीं, परिजन ने बताया अंश कुमार पढ़ाई में होशियार था। सीजीएल की तैयारी कर अपना कॅरिअर बनाना चाहता था।
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बेटे के आने का इंतजार कर रहा था परिवार, पहुंचा शव
- परिवार अंश कुमार के घर आने का इंतजार कर रहा था। उसने फोन पर 2-3 दिन में घर आकर पिता सियाराम सिंह को कीमोथेरेपी (कीमो) कराने के लिए अस्पताल ले जाने की बात कही थी। फोन के बाद परिवार उसके घर आने का इंतजार कर रहा था, ताकि पिता को अस्पताल ले जा सके, लेकिन मंगलवार की शाम बेटे का शव पहुंचा तो परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। बीमार पिता अपने इलाज के बारे में भूल कर कुलदीपक के बुझने के गम में ऐसे डूबे कि सुधबुध खो बैठे हैं। मां रीना देवी ने बताया उम्मीद थी कि बेटा पिता को इलाज के लिए ले जाएगा, लेकिन उसने खुद ही अपनी जान गवां दी। अब उनके दिन किसके भरोसे कटेंगे।
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