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हड़ताल

Thu, 03 Sep 2015 01:53 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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बुधवार को बैंकिंग सेक्टर पर हड़ताल का मिला-जुला असर देखने को मिला। स्टेट बैंक की शाखाएं खुली रहीं और उनमें लेन-देन के साथ बैंकिंग कारोबार होता रहा। पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक समेत अन्य बैंकों की करीब 300 शाखाओं में करीब 100 करोड़ रुपये का लेन-देन ठप हो गया।
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केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बैंक कर्मचारियों ने पहले केनरा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय, दीवानी चौराहे पर प्रदर्शन किया। हड़ताल में शामिल एआईबीईए, एआईबीओए, इन्बैफ, इन्बौक और बैफी से जुड़े कर्मचारियों ने संजय प्लेस स्थित स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद पर प्रदर्शन करने के बाद सभा की। इसमें एआईबीईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एमएम राय, केनरा बैंक इंप्लाइज यूनियन प्रदेश उपाध्यक्ष गुरुदेव सिंह ने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर जमकर हमला बोला और कर्मचारियों की छंटनी, भविष्य निधि को शेयर बाजार में लगाने जैसे कदमों की निंदा करते हुए वापस लेने की मांग की।
सभा में वक्ताओं ने बेरोजगार नौजवानों को नौकरी, जरूरी चीजों पर मूल्य नियंत्रण, न्यूनतम 15 हजार रुपये प्रति माह का वेतन देने और बोनस, उपदान पर ऊपरी सीमा को हटाए जाने की मांग की। सभा में अशोक सारस्वत, प्रेम चंद, एसके खोसला, सिद्धार्थ सहित बैंक कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
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एटीएम और नेट बैंकिंग का सहारा
माह की शुरुआत में ही बैंक हड़ताल से लोग परेशान रहे। छोटे कैश के लिए तो एटीएम का सहारा लिया। ज्यादा कैश के लिए प्राइवेट बैंक और स्टेट बैंक शाखाएं खुले रहने से कुछ राहत रही। नेट बैंकिंग होने से कैश ट्रांसफर आदि सेवाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ा।
आमने-सामने आई बैंक यूनियन
हड़ताल के समर्थन में वाम और कांग्रेस समर्थक ट्रेड यूनियनें थीं तो विरोध में भारतीय मजदूर संघ से जुड़े संगठन। हर शाखा में दोनों ही गुटों के कर्मचारियों की खासी संख्या है। ऐसे में कई शाखाओं में हड़ताल को लेकर दोनों यूनियनों के समर्थक आमने-सामने आ गए। हड़ताल विरोधी कर्मचारियों ने बैंकों में अंदर अपना कामकाज निपटाया तो हड़ताली कर्मचारी शाखाओं के बाहर विरोध-प्रदर्शन करते रहे।
हड़ताल का असर नहीं रहा है। बैंकिंग जारी रही। जहां क्लर्क नहीं थे, वहां अधिकारियों ने आगे बढ़कर कैश का भी लेन-देन किया है। वाम संगठन केवल ताकत दिखाना चाहते थे, जिसमें असफल रहे।
वीके गोयल
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
नेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स (नोबो)
स्टेट बैंक के अलावा सभी बैंकों में हड़ताल सफल रही है। हमने श्रमिकों के हित में जो आवाज उठाई थी, वह हर कर्मचारी के दिल तक पहुंची है। मजदूर संघ के लोग चमत्कारिक ढंग से हड़ताल से पीछे हटे।
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एमएम राय
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
ऑल इंडिया बैंक इंम्प्लाइज एसोसिएशन

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