हड़ताल के चलते जमीन के नामांतरण, दाखिल-खारिज और मुकदमों की पैरवी तक ठप है। शपथपत्र बनवाने के लिए आम जनता को कलेक्ट्रेट से दीवानी तक दौड़ लगानी पड़ रही है। बृहस्पतिवार को भी सदर तहसील में अधिवक्तागण, दस्तावेज लेखक, स्टाम्प वेंडर्स और उनके सहायकों की हड़ताल जारी रही।
ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू किए जाने के विरोध में तहसीलों में 10 दिनों से हड़ताल जारी है। तय समय पर जमीन का बैनामा न होने के कारण लेनदेन पूरी तरह से ठप है, जिससे सैकड़ों क्रेता-विक्रेता और गवाह परेशान हैं। उन्हें बयाने की रकम डूबने का डर सता रहा है।
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जिले में कुल 10 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय हैं, जहां प्रतिदिन करीब 250 से 300 दस्तावेज की रजिस्ट्री होती है। इससे प्रतिदिन औसतन 4 से 5 करोड़ रुपये का स्टाम्प राजस्व प्राप्त होता है। स्टाम्प विभाग की ओर से 4 जून से ई-रजिस्ट्री (फ्रंट ऑफिस व्यवस्था) लागू की गई है, जिसके विरोध में कार्य बहिष्कार चल रहा है। 10 दिनों में करीब 3,000 दस्तावेज का पंजीकरण नहीं हो सका है, जिसके कारण संपत्तियों के सौदों में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन अटक गया है।
रजिस्ट्री के अलावा विवाह पंजीकरण, अभिलेखागार से सत्यापित नकल और भार-मुक्त (एनईसी) प्रमाणपत्र के लिए आवेदक भटक रहे हैं। जमीन के नामांतरण, दाखिल-खारिज और मुकदमों की पैरवी तक ठप है। शपथपत्र बनवाने के लिए आम जनता को कलेक्ट्रेट से दीवानी तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
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बृहस्पतिवार को भी सदर तहसील में अधिवक्तागण, दस्तावेज लेखक, स्टाम्प वेंडर्स और उनके सहायकों की हड़ताल जारी रही। हड़ताल के कारण तहसील परिसर में कोई भी न्यायिक और निबंधन (रजिस्ट्री) कार्य नहीं हुआ। सभी संगठनों ने मांगें पूरी न होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान किया।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभूनाथ वर्मा और महासचिव अरविंद कुमार दुबे ने किया। इस अवसर पर दस्तावेज लेखक संघ के सचिव आशू यादव, रामकुमार रावत, मनोज कुमार उपाध्यक्ष, तहसील बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर राजपूत, राजीव उपाध्याय, दिव्यांश पांडेय आदि मौजूद रहे।