उत्तर प्रदेश के आगरा में शहर की पॉश कॉलोनियों, गांव और गलियों तक छुट्टा सांड और गाय लोगों की जान ले रहे हैं। प्रशासन बेबस है। तमाम कवायदों के बाद भी छुट्टा गोवंश से निजात नहीं मिल रही। ये स्थिति तब है जब एक नवंबर से जिले में डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने छुट्टा गोवंश संरक्षण के लिए अभियान चलाने के आदेश दे रखे हैं। छुट्टा गोवंश के हमले अभियान की पोल खोल रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ छह साल से गोवंश संरक्षण के लिए अधिकारियों को निर्देश पर निर्देश दे रहे हैं। बार-बार मियाद बढ़ाई जा रही है, लेकिन गोवंश का संरक्षण नहीं हो पा रहा। पांच गोशालाओं का निर्माण अधूरा पड़ा है। सभी गोशालाओं में क्षमता से अधिक पशु हैं। ऐसे में बाहर घूम रहे गोवंश को पकड़ कर रखने के लिए जगह नहीं। इधर, शहर से ग्रामीण क्षेत्रों तक छुट्टा गोवंश हमलावर हैं।
डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने एक नवंबर से 31 दिसंबर तक 60 दिन में 100 प्रतिशत निराश्रित गोवंश को आश्रय स्थलों में पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। पकड़ने के लिए 20 कैटल कैचर लगाए हैं। पुलिस, राजस्व विभाग के साथ पशुपालन, नगर निगम और जिला पंचायत राज विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है। डीएम ने रोज समीक्षा का दावा किया था, लेकिन धरातल पर हकीकत नहीं बदली।
केस-1
बरहन के गांव मुखवार में मंगलवार को मीरा देवी पत्नी देवेश कुमार शाम 4 बजे घूरे पर कूड़ा डालने गईं थीं। जहां गाय ने सींग से महिला का पेट फाड़ दिया। गंभीर घायल मीरा देवी जिंदगी के लिए निजी अस्पताल में जूझ रहीं हैं।
केस- 2
खंदौली के खेरिया गांव में खेत पर मंगलवार को मवेशी भगाते समय 45 वर्षीय राकेश पर सांड़ ने हमला कर दिया। अन्य किसानों ने राकेश को सांड़ के हमले से बचाया। गंभीर रूप से घायल किसान का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
केस- 3
कमला नगर निवासी प्रशांत गुप्ता 16 अगस्त को सुबह साइकिल से दूध लेने जा रहे थे। रास्ते में छुट्टा सांड ने उन पर हमला कर दिया। सिर व छाती में गंभीर चोटें लगीं। करीब 10 दिन अस्पताल में इलाज चला। 26 अगस्त को प्रशांत गुप्ता ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।