भूकंप के झटकों ने नेपाल की अर्थ व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है, लेकिन यह अजीब है कि इसका असर भारत के पर्यटन को बढ़ा सकता है। दो साल से ताजमहल पर घट रही सैलानियों की तादात नेपाल में भूकंप के झटकों के बाद बढ़ सकती है, लेकिन इसके लिए देश के पर्वतीय इलाकाें, हिमाचल प्रदेश, नार्थ ईस्ट और दार्जिलिंग में नेपाल की तरह इन्फ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन सुविधाएं विकसित करनी होंगी। टूर आपरेटरों के मुताबिक, अभी बुकिंग बेशक कैंसिल हो रही हों, लेकिन नेपाल में पुनर्निर्माण तक देश में पर्यटकों की तादात बढ़ सकती है।
टूरिज्म गिल्ड के महासचिव राजीव सक्सेना के मुताबिक, घरेलू पर्यटकों को अब नेपाल की जगह घरेलू पर्यटन स्थल ही रास आएंगे। इसी तरह एडवेंचर टूरिज्म को तलाशने वाले विदेशी सैलानियों को भी भारत के पर्यटक स्थल लुभाएंगे, बशर्ते इस दौर में हम दुनिया भर में प्रचार कर पाएं। भारत में किसी भी वजह से आने वाले सैलानी ताजमहल देखने जरूर आते हैं। इससे यहां भी सैलानियों की संख्या बढ़ेगी।
नेपाल का कल्चर दें तो बढ़ेगा नार्थ ईस्ट
आगरा। होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन अध्यक्ष रमेश वाधवा के मुताबिक, नेपाल में पर्यटकों को अलग ही अनुभव होता है। वह एडवेंचर टूरिज्म के साथ नेपाल की संस्कृति में घुल मिल जाते हैं। दुनिया भर के सैलानियों को ताजमहल के नाम पर भारत में बुला रहे हैं, लेकिन इसके साथ हम अपने पहाड़ी क्षेत्रों को नेपाल की तर्ज पर विकसित कर पाएं तो सैलानियों की तादात बढ़ पाएगी। नार्थ ईस्ट, हिमाचल प्रदेश और दार्जिलिंग में काफी संभावनाएं हैं, जबकि उत्तराखंड में प्रलय का खौफ अभी खत्म नहीं हुआ।
नेपाल की दहशत से फिलहाल कैंसिलेशन
आगरा। नेपाल में आए भूकंप से विदेशी ग्रुप कैंसिल हो रहे हैं। दरअसल, विदेशी सैलानियों के 15 दिन के टूर में 10 दिन भारत और करीब 5 दिन नेपाल की शामिल रहते हैं। इनमें लुंबनी, काठमांडू, पोखरा, जनकपुर आदि जगहें शामिल रहती हैं। भूकंप से डरे यूरोपीय और अमेरिकी सैलानियों ने विजिट ही कैंसिल कर दी है। आगरा के होटलों, टूर आपरेटरों पर दनादन कैंसिलेशन के ई-मेल आ रहे हैं। ली पैसेज टूर इंडिया के मैनेजर राजेश शर्मा के मुताबिक, भारत से वाकिफ विदेशी सैलानियों को धर्मशाला, कश्मीर, दार्जिलिंग भेजा जा सकता है, लेकिन जो नए सैलानी हैं, वह नेपाल की जगह कहीं और नहीं जाएंगे।