वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने कथावाचक देवकीनंदन शर्मा उर्फ देवकीनंदन ठाकुर के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया था। आरोप लगाया था कि 3 दिसंबर 24 को उन्हें समाचारपत्र और टीवी चैनलों के माध्यम से पता चला कि कथावाचक देवकी नंदन ने वाराणसी में कथा के दौरान भारत विभाजन व कश्मीरी ब्राह्मणों के नरसंहार के लिए जयचंदों को दोषी बताया था। यह सुनकर उन्हें मानसिक आघात पहुंचा था।