फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: दो हाथ से तो निशाना साध नहीं पाते...ऐसे ताने सुने तो दिखाया हुनर, पढ़ें सोनिया और कैलाश के जज्बे की कहानी

Tue, 03 Dec 2024 03:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा

सार

World disabilities day 2024: ताजनगरी के दिव्यांगों ने देश और दुनिया में सफलता का परचम लहराकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इनका जज्बा ऐसा है कि विकलांगता को कभी मंजिल के रास्ते में आने ही नहीं दिया। जो ठान लिया, उसके करके ही माने।

 
विज्ञापन
सोनिया शर्मा और कैलाश - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कलम तो ढंग से पकड़ नहीं सकता, गेंद-बल्ला क्या चलाएगा। दो हाथ से तो निशाना साध नहीं पाते, तेरा तो एक ही है। ऐसे ताने हृदय में शूल की तरह चुभते। आए दिन ऐसा होने पर मन में निराशा घर कर रही थी। पर, ठान लिया कि सफलता ही इनका जवाब है। फिर क्या... हौसले फौलादी किए, संघर्ष को पंख बनाया और सफलता को छू लिया।
विज्ञापन


ऐसे ही आगरा के होनहार दिव्यांग खिलाड़ी सोनिया शर्मा और कैलाश प्रसाद हैं। उन्होंने अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं समझा। लक्ष्य पाने के लिए दोगुने जोश से अभ्यास किया। कैलाश ने भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम की कमान संभाली तो सोनिया ने निशाना लगाकर देश-विदेश में सोने के तमगे जीते।

ये भी पढ़ें -  UP: साइबर ठगों का वो गैंग...जिसमें बने एजेंट और छह महीने में 110 करोड़ कमाए; सरगना सहित पांच गिरफ्तार
विज्ञापन



 
Trending Videos

ताऊ के तानों ने बना दिया क्रिकेटर
अकाेला के कल्याणपुर मुल्लाजी की प्याऊ निवासी कैलाश प्रसाद ने बताया कि कमजोर हाथ को देखते हुए पड़ोसी-दोस्त यहां तक कि परिजन भी मजाक उड़ाते थे। क्रिकेट का शौक था और खेलने लगा। ताऊजी कहते ये क्या क्रिकेट खेल पाएगा। ये शब्द मेरे लिए प्रेरक बन गए, सोच लिया ताऊजी की इस सोच को गलत साबित करना है। वर्ष 2003 में सेंट जोंस कॉलेज मैदान पर दिव्यांग टीम के लिए ट्रायल दिया और सफल हो गया। गेंद, बल्ले से धमाल मचाते हुए राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा। 2024-23 तक भारतीय टीम की कप्तानी संभाली। अब मेरी सफलता पर सबसे ज्यादा ताऊ ही खुश हैं। मेरी यही सीख है दिव्यांग हो तो ईश्वर आपके संघर्ष की परीक्षा ले रहा है।
विज्ञापन

अपने पर अविश्वास ही दिव्यांगता
कमला नगर की सोनिया शर्मा ने बताया कि जन्मजात एक हाथ नहीं है। ये देख निराश होती थी। लोग ताने मारते थे, मैंने ठान लिया कि अलग पहचान बनानी है और शूटिंग का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। 2015 में पिता का देहांत होने पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां जनक शर्मा ने हौसला बढ़ाया। वर्ष 2015 में दिल्ली में हुए यूपी स्टेट शूटिंग कंपटीशन में पहला मेडल मिला। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल पाया। अब तक देश-विदेश में 21 से अधिक पदक पा चुकी हूं। कभी ताने मारने वाले अब मेरी तारीफ करते नहीं थकते। मेरा मानना है कि अपने पर अविश्वास ही दिव्यांगता है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें