परिषदीय स्कूलों में फर्जी बीएड डिग्री के साथ शिक्षक बनने वालों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ एसआईटी ने उन्हें बर्खास्त करने की संस्तुति की है, वहीं प्रदेश सरकार ने अब इन शिक्षकों की आगे की जांच के लिए एसटीएफ आगरा को नियुक्त कर दिया है। एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है।
किसी भी समय एसटीएफ जिले में पहुंचकर भर्ती प्रक्रिया में शामिल लोगों और शिक्षकों से बात कर सकती है। वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2004-05 में जारी बीएड की डिग्रियों की जांच कराने के निर्देश दिए थे।
जांच के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों ने डॉ. आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम पर बीएड की फर्जी डिग्री हासिल की हैं। वहीं बड़ी संख्या में छात्रों के बीएड अंकपत्र पर अंकों में हेराफरी की गई। एसआईटी ने जांच में पाया कि प्रदेश में 50 हजार से अधिक बीएड डिग्रीधारकों के अंकपत्रों में या तो हेराफेरी की गई या फिर पूरी तरह से फर्जी अंकपत्र जारी हुए।
जांच के बाद पाया कि पांच हजार से अधिक ऐसे लोग हैं, जिन्होंने फर्जी और टेंपर्ड बीएड के अंकपत्र के माध्यम से शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल कर ली।
एसआईटी ने जांच में मैनपुरी के 80 शिक्षकों को फर्जी और टेंपर्ड अंकपत्र के सहारे नौकरी करने का आरोपी पाया गया।
इनकी सूची नवंबर 2018 में बीएसए को भेजी गई थी। दो बार नोटिस जारी होने के बाद अभी तक इन शिक्षकों की बर्खास्तगी नहीं हो सकी है। अब शासन ने इन शिक्षकों की जांच के लिए एसटीएफ आगरा को जिम्मेदारी सौंपी है।
दो बार जारी हो चुके हैं बर्खास्तगी के नोटिस
एसआईटी की सूची में शामिल 80 शिक्षकों को बीएसए द्वारा वर्ष 2018 व 2019 में दो बार बर्खास्तगी के नोटिस जारी किए हैं। इसके बाद भी उनकी बर्खास्तगी न हो पाने से कई सवाल उठे रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर इन फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी क्यों नहीं हो पा रही है।
एसटीएफ ने पूर्व में लखनऊ से पकड़ा था सरगना
एसटीएफ ने पूर्व में फर्जी दस्तावेजों के सहारे शिक्षक बनने वाले मैनपुरी के सरगना को लखनऊ से पकड़ा था। उसे पकड़ने के बाद जेल भेज दिया गया था। अब एसटीएफ को जिले के ऐसे ही फर्जी शिक्षकों की तलाश है, जिनके द्वारा ठेका लेकर बड़ी संख्या में युवाओं को फर्जी अंकपत्र व डिग्री प्रदान कराकर शिक्षक बनवाया है।
विजय प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई अंतिम चरण में है। अंतिम नोटिस जारी किया जा चुका है।विश्वविद्यालय को पूर्व में तीन बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन विश्वविद्यालय अंकपत्र के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रहा है। यदि इस बार भी विश्वविद्यालय जवाब नहीं देगा तो उच्चाधिकारियों से राय के बाद फर्जी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।