ताजमहल के बसई घाट पर 1960 तक जो सीढ़ियां दिखाई देती थीं, वो अब नजर नहीं आती हैं। अब यमुना नदी की सफाई और सिल्ट हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने नई उम्मीदों को जगा दिया है।
यमुना नदी की सफाई और सिल्ट हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने नई उम्मीदों को जगा दिया है। 60 साल में यमुना नदी में जमा हो रही सिल्ट ने स्मारकों और घाटों को दफन कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिर से बसई घाट, हाथी घाट, एत्माददौला, रामबाग और चीनी का रोजा समेत नदी किनारे के स्मारकों के हिस्से नजर आ सकेंगे।
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ताजमहल के पूर्वी गेट पर दशहरा घाट और पश्चिमी गेट पर बसई घाट है। दशहरा घाट और इसकी सीढि़यां तो दिखाई देती हैं, लेकिन पश्चिमी गेट पर बसई घाट की सीढि़यां और घाट नजर नहीं आते। दरअसल, यमुना नदी की सिल्ट और गंदगी जमा होने के कारण बसई घाट का अस्तित्व ही खत्म हो गया, जबकि 60 साल पहले की तस्वीरों में बसई घाट की लाल पत्थर से बनी सीढि़यां और घाट स्पष्ट नजर आते हैं।
घाट के आगे जिस तरह से दशहरा घाट पर नदी में कुएं नजर आते हैं, वैसे ही ताजमहल की नींव की तरह बनाए गए कुएं बसई घाट पर भी थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास इस घाट की तस्वीरें हैं, वहीं आस्टि्रयाई इतिहासकार ईवा कोच की पुस्तक में भी बसई घाट की सीढि़यों के चित्र प्रकाशित किए गए हैं। अब यमुना नदी की सिल्ट में यह दफन हो चुके हैं।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
12 फीट नीचे दबी हैं सीढ़ियां
ताजमहल के बसई घाट पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने चार साल पहले साइंटिफिक क्लीयरेंस का काम शुरू कराया था, जिसमें मौजूदा तल से 12 फीट नीचे लाल पत्थर की बनी सीढि़यां निकली थीं। यह पहली सीढ़ी थी, जिसके बाद नदी तक 12 सीढि़यां और हैं। बसई घाट पर लगभग 24 फीट सिल्ट जमा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वर्ष 1960 में ताजमहल के पश्चिमी गेट पर बसई घाट और खान ए आलम के बीच पत्थरों की ठोकर बनाई थी, जिससे यमुना का पानी बाढ़ के दौरान सीधे ताज की दीवार से नहीं टकराए। उस ठोकर के निर्माण के बाद ताज का बसई घाट सिल्ट में दफन होता चला गया, जिसकी सफाई न होने से अब यहां घाट के ऊपर ही 12 फीट तक सिल्ट जमा है।
एत्मादौला की कोठरियों में भरी थी सिल्ट
यमुना नदी में सिल्ट जमा होने के कारण बाढ़ का पानी स्मारकों में बने कमरों में भर जाता है, जिससे एत्माददौला, रामबाग और ताजमहल के भूमिगत कमरों में कई साल तक सिल्ट भरी रही। एत्माददौला में साल 2016 में भूमिगत कक्षों की सफाई कराई गई, जिनमें यमुना नदी के किनारे हर कमरे में 7 से 8 फुट तक सिल्ट भरी पाई गई थी। यही हाल रामबाग का था, जिसकी सफाई साल 2003 में कराई गई थी। मुगल बादशाह बाबर ने रामबाग में जो कमरे नदी किनारे बनवाए थे, वह बेहद ठंडे थे, लेकिन उनमें सिल्ट भर गई थी। एएसआई ने बाद में यहां खिड़कियों पर दीवारें और दरवाजे लगाकर बंद कर दिया। ताजमहल में भी उत्तरी ओर के दोनों दरवाजों को ईंटों से बंद कर दिया गया है।
11 जुलाई तक देना है जवाब
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि हमने यमुना नदी की शहर सीमा में सफाई की मांग याचिका में की है। कोर्ट के आदेश से कैलाश घाट से दशहरा घाट तक सिल्ट हटाने का काम हो सकता है। 11 जुलाई तक सरकार को जवाब दाखिल करना है।
एजेंसी की जिम्मेदारी तय की जाए
नेशनल चेंबर के पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद यमुना की डिसिल्टिंग जल्द शुरू की जाए। इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी तय करके काम शुरू कराया जाए तो हर साल अनवरत चलता रहे। इससे नदी की धारण क्षमता, पारिस्थितिकी में सुधार होगा।
आगरा के हित में आदेश आया
आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल ने बताया कि लंबे समय बाद आगरा के हित में आदेश आया है। यह सरकार और विभागों की जिम्मेदारी है कि इसे जल्द अमल में लाया जाए। इससे नदी किनारे के स्मारकों के साथ यमुना नदी की स्थिति में सुधार नजर आएगा।