मैनपुरी। जनपद की विख्यात और ऐतिहासिक श्रीदेवी मेला एवं ग्राम सुधार प्रदर्शनी का शनिवार को मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन कर शुभारंभ हो गया। मेला प्रदर्शनी का उद्घाटन 29 मार्च को होगा। इस वर्ष श्रीदेवी मेला का शताब्दी वर्ष मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। पिछले वर्षाें की अपेक्षा इस वर्ष मेला और अधिक भव्य और आकर्षित होगा। 100 वर्ष पूर्व श्रीदेवी मेला प्रदर्शनी की शुरूआत हुई थी, मेला आज विस्तृत रूप ले चुका है। जनपद ही नहीं बल्कि आसपास जनपदों में श्रीदेवी मेला और मां शीलता की कृपा विख्यात है। यहीं वजह है कि मां के दर्शन और मेला देखने लोग दूर-दूर से आते है। मेला में देश और प्रदेश के दुकानदार अपनी-अपनी दुकानें सजाते है। इनसे स्थानीय लोगों को जनपद में ही दूर-दूर की वस्तुएं आसानी से प्राप्त हो जाती है। इस वर्ष श्रीदेवी मेला के शताब्दी वर्ष को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। रंगाई-पुताई के साथ परिसर को आकर्षक और भव्य बनाया जा रहा है। इतना नहीं मेला में झूलों, सर्कस, खेल-तमाशे, खान-पान की वस्तुओं की दुकानें लगने को तैयार हैं। इस वर्ष का श्रीदेवी मेला अपनी अनूठे आयोजन का गवाह बनेगा। इस वर्ष श्रीदेवी मेला को अधिक भव्य बनाने के उद्देश्य से देश और प्रदेश के दुकानदारों को आमंत्रित किया गया है। इस वर्ष मेला में बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा के सोनीपत और पानीपत, दिल्ली, मुरादाबाद, औरेया, इटावा, अलीगढ़, सहसवान, हरदोई, एटा के दुकानदार अपनी दुकानों के साथ आ रहे हैं। वर्ष 1925 में राजा शिवमंगल सिंह के सहयोग से तत्कालीन जिलाधिकारी जैनुउद्दीन अहमद के प्रयास से पहली बार मेले के साथ प्रदर्शनी का आयोजन कराया गया। मेला जनपद की सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक, रहन-सहन, खान-पान, लोक संस्कृति और भाषा को एक मंच प्रदान करता है। इसमें विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते है। राजा शिवमंगल सिंह चौहान ने मेले एवं प्रदर्शनी की देखरेख के लिए एक न्यास का गठन किया। जिसमें जिलाधिकारी को न्याय का अध्यक्ष बनाया और स्वयं को इस शर्त के साथ न्यास का संरक्षक रखा कि सदैव उन्हीं के वंशज न्यास के संरक्षक रहेंगे।