श्रीकृष्ण विराजमान द्वारा वर्ष 1967 में अपनी जमीन के संबंध में की गई डिक्री (न्यायिक निर्णय)को रद्द करने के लिए अदालत में किए गए दावे के कुल चार प्रतिवादी में से तीन अदालत में हाजिर हुए। उनके द्वारा नोटिस की पुष्टि की गई और संबंधित पत्रावली मांगी। इसके अलावा अपील में शामिल होने वाले तीन अन्य प्रतिपक्षीगणों के अधिवक्ता भी अदालत में हाजिर हुए। न्यायालय ने अग्रिम सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तारीख तय की है।
श्रीकृष्ण विराजमान द्वारा अपनी जमीन से संबंधित डिक्री को रद्द करने की मांग को लेकर अदालत में दावा दाखिल किया गया। जिसकी सुनवाई जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में चल रही है। बुधवार को इसमें प्रतिवादीगणों को हाजिर होना था। दावे के प्रतिवादीगणों में से यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड चेयरमैन के अधिवक्ता फरहान लखनऊ से आए और अदालत में बोर्ड की ओर से वकालतनामा दाखिल किया। जबकि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान सचिव कपिल शर्मा की ओर से अधिवक्ता मुकेश खंडेलवाल ने वकालतनामा लगाया।
वहीं कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद तथा उनके साथ नीरज शर्मा और सौरभ श्रीवास्तव ने भी वकालतनामा दाखिल किया। जबकि श्रीकृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट मथुरा के मैनेजिंग ट्रस्टी अनुराग डालमिया की ओर से कोई वकालतनामा दाखिल नहीं किया गया। इसके अलावा तीर्थ पुरोहित महासभा, माथुर चतुर्वेद परिषद तथा अखिल भारतीय हिन्दू महासभा की ओर से भी अदालत में अधिवक्तागण हाजिर हुए। डीजीसी क्रमिनल शिवराम तरकर ने बताया कि सभी प्रतिवादीगण ने कोर्ट से पत्रावली मांगी हैं तथा न्यायालय ने अग्रिम सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तारीख तय की है।