सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण में अदालत में पेश किए गए दावे पर जिला जज की अदालत में रिवीजन पर सुनवाई जारी है। मंगलवार को जिला जज की अदालत में दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा। अदालत ने 21 अप्रैल की तारीख अगली सुनवाई के लिए नियत की है।
13.37 एकड़ जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा अदालत में पेश किए गए दावे के रिवीजन पर जिला जज राजीव भारती की अदालत में सुनवाई मंगलवार को भी चली। रंजना अग्निहोत्री के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत को बताया उनका दावा सुनवाई योग्य है, जबकि शाही ईदगाह मस्जिद के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि उपासना स्थल अधिनियम के तहत यह दावा सुनवाई योग्य नहीं है।
21 अप्रैल को सुनवाई
उन्होंने बताया कि अदालत अब इस संबंध में 21 अप्रैल को सुनवाई करेगी। बता दें सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने 20 सितंबर 2020 को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद प्रस्तुत किया था। अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद वाद को जिला जज की अदालत में रिवीजन में ले जाया गया।
इससे पूर्व 7 मार्च को जिला जज राजीव भारती की अदालत में श्रीकृष्ण जन्मस्थान प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री की ओर से पेश किए गए वाद में दो प्रतिवादियों ने बहस की थी। जिसमें कहा गया कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के साथ इंतजामिया कमेटी का समझौता हुआ और 1973 में यह समझौता डिक्री (न्यायिक निर्णय) हुआ। जब ट्रस्ट अभी भी काम कर रहा है तो कोई भक्त बनकर ट्रस्ट के समझौते के खिलाफ कैसे जा सकता है। वहीं प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि जो समझौता हुआ था, वह मालिकाना हक को लेकर नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह वाद निचली अदालत ने दायर नहीं किया तब प्रकीर्ण वाद को जिला जज की अदालत में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।