मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री की ओर से पेश किए गए दावे में सोमवार को जिला जज की अदालत में वक्फ बोर्ड व इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ताओं ने करीब डेढ़ घंटे तक बहस की। उन्होंने दावे की कमियों को बताते हुए कहा कि दावा स्वीकार करने योग्य नहीं है। इससे पूर्व अदालत में वादी पक्ष की बहस पूरी हो चुकी है। अगली सुनवाई 22 मार्च को होगी।
जिला जज राजीव भारती की अदालत में श्रीकृष्ण जन्मस्थान प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री की ओर से पेश किए गए वाद में दो प्रतिवादियों ने बहस की। इसमें कहा गया कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के साथ इंतजामिया कमेटी का समझौता हुआ और 1973 में यह समझौता डिक्री (न्यायिक निर्णय) हुआ। जब ट्रस्ट अभी भी काम कर रहा है तो कोई भक्त बनकर ट्रस्ट के समझौते के खिलाफ कैसे जा सकता है।
दावा स्वीकार योग्य नहीं है- प्रतिवादी पक्ष
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि जो समझौता हुआ था, वह मालिकाना हक को लेकर नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह वाद निचली अदालत ने दायर नहीं किया तब प्रकीर्ण वाद को जिला जज की अदालत में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
इंतजामिया कमेटी शाही मस्जिद ईदगाह की ओर से सचिव तनवीर अहमद, नीरज शर्मा एडवोकेट, अबरार हुसैन और वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता जीपी निगम ने बहस की। सचिव तनवीर अहमद ने बताया कि अभी बहस बाकी है। अदालत में मौजूद वादी के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और पंकज वर्मा ने बताया कि अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 मार्च की तारीख तय की है।