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स्पेस टेक्नोलॉजी से स्मारकों का ‘खास’ ख्याल

Fri, 22 Jan 2016 01:57 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आगरा
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ताजमहल की तरह देश भर के स्मारकों की प्रतिबंधित सीमा में होने वाले अवैध निर्माण और अतिक्रमण की निगरानी स्पेस टेक्नोलॉजी से होगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ मिलकर एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सभी स्मारकों और धरोहरों की 3डी इमेज और सेटेलाइट मैप तैयार कर रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बंगलूरू सर्किल ने इसे सबसे पहले किया है और अब बारी आगरा सर्किल की है। यहां ताजमहल, किला और फतेहपुर सीकरी जैसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स शामिल हैं। जोधपुर में पांच सर्किलों के अधिकारियों को इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सेटेलाइट मैप और थ्री डी इमेज तैयार होने के बाद संरक्षण के साथ स्मारकों पर निगरानी रखी जा सकेगी।
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स्मारकों के तीनों जोन का रहेगा डाटा
इसरो के साथ मिलकर एएसआई स्मारकों का पूरा डाटा तैयार कर रहा है। स्मारकों के 100 मीटर जोन को लाल रंग से प्रोटैक्टेड जोन दर्शाया गया है, वहीं 100 से 300 मीटर के प्रतिबंधित दायरे को पीले रंग से और उससे अधिक के क्षेत्र को रेग्यूलर के तौर पर हरे रंग के घेरे में दिखाया गया है। एएसआई बंगलूरू सर्किल ने सभी स्मारकों का यह सेटेलाइट मैप तैयार किया है, जबकि गोल गुंबज, टीपू सुल्तान का महल सहित आधा दर्जन धरोहरों के थ्री डी इमेज भी तैयार किए गए हैं। इसरो और एएसआई के इस प्रोजेक्ट के लिए वेबसाइट भी बनाई गई है जिसमें देश के सभी राज्यों के अंतर्गत सभी सर्किलों के स्मारकों का ब्योरा दर्ज होगा। आगरा सर्किल का काम जल्द शुरू किया जाएगा।
पांच सर्किलों में जल्द शुरू होगा काम
आगरा, जयपुर, चंडीगढ़, बड़ौदा और जोधपुर सर्किल के अधिकारियों का प्रशिक्षण गुरुवार से जोधपुर में शुरू हुआ है। इसमें उन्हें वर्ल्ड हेरिटेज साइटों के ग्रुप बनाकर और थ्री डी इमेज का रिकार्ड रखने की ट्रेनिंग दी जा रही है। वर्कशॉप में बताया गया कि इसरो अपने उपग्रहों कार्टोसेट-1, कार्टोसेट-2 और रिसोर्ससेट-4 का प्रयोग कर रहा है। स्मारकों के पास के तीनों जोन में मौजूद सुविधाओं का सटीक नक्शा तैयार करने केसाथ जमीनी फोटोग्राफ, स्मारक के अलग-अलग दृश्य, हेरिटेज भवन की ऊंचाई, इमारतों और गलियों के फोटो भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। तीन साल में आगरा के सभी स्मारकों का थ्री डी इमेज और सेटेलाइट मैपिंग पूरी हो जाएगी।
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‘सेटेलाइट मैप और थ्री डी इमेज से स्मारकों की प्रतिबंधित सीमा का पूरा रिकार्ड होने से अवैध निर्माण और प्रतिबंधित क्षेत्र का विवाद खत्म हो जाएगा। बंगलूरू में रेवेन्यू रिकार्ड डिजिटल है, आगरा में ऐसा नहीं है, इसलिए यहां अभी समय लगेगा। हम स्मारकों के पास के रिकार्ड निकलवा रहे हैं।’
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- डा. भुवन विक्रम, अधीक्षण पुरातत्वविद्, आगरा
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