सिकंदरा के होटल में सपा के चर्चित नेताजी को उनकी गर्लफ्रेंड के साथ पुलिस ने रंगरेलियां मनाते पकड़ लिया। उनकी पहुंच के आगे पुलिस अधिकारियों के पसीने छूट गए। फोन घनघनाने लगे। मीडिया के आने पर नेताजी मुंह छिपाकर बाथरूम में कैद हो गए। उनकी गर्लफ्रेंड को भी कमरे में बंद कर दिया गया। साढ़े तीन घंटे चले हाई प्रोफाइल ड्रामे के बाद पहले युवती को बाहर निकाला गया। पुलिस भी उल्टे पांव लौट गई। कुछ देर बाद नेताजी भी कालर उठाते हुए बाहर निकल आए। मीडिया के सवालों में घिरते उससे पहले ही बाहर खड़ी गाड़ी में बैठकर भाग खड़े हुए।
सिकंदरा स्मारक के सामने स्थित होटल में थाना पुलिस को सूचना मिली कि कुछ युवक और युवती रंगरेलियां मना रहे हैं। इस पर इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र सिंह सिरोही ने सिपाहियों के साथ शाम तकरीबन पांच बजे छापा मारा। युवक और युवतियों के साथ कमरा नंबर 103 में तलाशी के दौरान सपा के एक चर्चित नेताजी एक युवती के साथ रंगरेलिया मनाते पकड़ लिए गए। पुलिस को देखा तो पहले तो सकपका गए। फिर सत्ता का रौब गांठने लगे। इंस्पेक्टर को भी हड़काया। कुछ ही देर में इंस्पेक्टर के पास पुलिस अधिकारियों के फोन घनघनाने शुरू हुए। जो पुलिस छापा मारने आई थी वह उन्हें बचाने में जुट गई। कुछ ही देर में मीडिया को भी नेताजी की करतूत का पता चल गया। मीडिया ने होटल घेर लिया। मीडिया के पहुंचते ही नेताजी ने मुंह छिपा लिया। हाथ जोड़ने लगे। इससे भी बात नहीं बनी तो कमरा नंबर 111 के बाथरूम में अंदर से कुंडी लगाकर कैद हो गए।
एक चौकी इंचार्ज के साथ युवती कमरा नंबर 103 मेें बंद कर दी गई। जैसे-जैसे देर लगती गई नेताजी की सेटिंग का खेल भी शुरू हो गया। पुलिस अधिकारियों के पास फोन घनघनाने लगे। दो घंटे तक नेताजी बाहर नहीं आए। न ही युवती को निकाला गया। 7:15 बजे सीओ अशोक कुमार सिंह भी पहुंचे। इस बीच महिला पुलिस भी बुला ली गई। उन्होंने अंदर जाकर नेताजी से बात की, फिर युवती से। आधा घंटे बाद युवती का चेहरा ढककर बाहर निकाला। वह सड़क पार करते भागती चली गई। सीओ, इंस्पेक्टर भी सिपाहियों के साथ उल्टे पांव लौट गए। उधर, नेताजी बाहर आने की जुगत करते रहे। मीडिया वालों ने बाथरूम के गेट में धक्का दिया तो यह नेता कालर उठाते हुए बाहर आ गए। बाहर आते ही रौंब गांठना शुरू कर दिया। फिर क्या था। मीडिया के सवालों में घिरने लगे तो रोड की तरफ बढ़ गए। बोले निजी काम से आना कोई गुनाह तो नहीं है। लेकिन, बाथरूम में क्योें बंद थे इसका जवाब नहीं दे पाए। बोले, क्या सार्वजनिक स्थल पर आना अपराध है। मैं अपने काम से आया था। मुझे क्या मालूम पुलिस क्यों आई। बाहर क्या बवाल हुआ इससे मेरा क्या लेना-देना है। इसके बाद स्विफ्ट कार मेें बैठकर चलते बने। पुलिस ने भी किसी तरह की कार्रवाई करने से इंकार कर दिया। इंस्पेक्टर का कहना है कि नेताजी और युवती अलग-अलग कमरे में थे। इसमें क्या कार्रवाई की जा सकती है।
अपना बैग भी छोड़ गई युवती
युवती मेट्रो मोबाइल कंपनी की एजेंसी में कर्मचारी है। होटल में पुलिस के आने पर वह रोने लगी। कमरे में पुलिस के सामने उसने एक ही बात कही कि अगर घर पर पता चल गया तो बदनामी हो जाएगी। वह मर जाएगी। वह अपना बैग भी कमरे में पड़ी खाली जगह में पटककर चली गई।
अय्याशी का अड्डा बना है होटल
सिकंदरा का होटल अय्याशी का अड्डा बना है। दो मंजिला होटल में बेसमेंट में रेस्टोरेंट बना हुआ है। इसके साथ ही 11 कमरे हैं, जिसमें तीन कमरे थे। उनमें कुछ लड़के ठहरे हुए थे। उनकी रजिस्टर पर एंट्री भी थी। मगर, नेताजी के नजदीकि का होटल है। इस कारण उनकी एंट्री भी नहीं की गई। इसमें रिसेप्शन पर बैठी युवती भी मीडिया के सवालों का जवाब देने से कतराती रही। होटल के जिस कमरे के बाथरूम में नेताजी छिपे थे, उसके एक बाथरूम से दूसरे कमरे के बाथरूम में जाने के लिए चोर खिड़की भी है। क्योंकि नेताजी छिपे थे कमरा नंबर 111 में और बाहर आए तो 109 के बाथरूम से।
पुलिस ने अय्याशी पर यूं डाला पर्दा
पुलिस ने नेताजी को बचाने के लिए होटल में चल रही अय्याशी पर भी पर्दा डाल दिया। कमरा नंबर 101, 113 और 105 में भी युवक ठहरे हुए थे। उनसे पूछताछ नहीं की। बताया गया है कि कुछ युवती पहले पकड़ी गईं थी उन्हें भी जाने दिया।
नेताजी के विरोधी हुए सक्रिय
आगरा। सिकंदरा क्षेत्र के होटल में नेताजी को गर्ल फ्रेंड के साथ पकड़े जाने की खबर मिलते ही उनके विरोधी सक्रिय हो गए। दनादन फोन होने लगे। कई नेता तो ऐसे थे जिन्होंने मीडिया कर्मियों में फोन करके घटना की जानकारी दी। कुछ विरोधी मौके पर पहुंच गए और वहीं से फोन पर पल-पल की जानकारी अपने आकाओं तक पहुंचा रहे थे। कुछ लोगों ने तो सीधे लखनऊ, सैफई और दिल्ली तक संपर्क साधना शुरू कर दिया। दरअसल पार्टी के ये चर्चित नेताजी ने विरोधियों को लंबी फौज जमा कर ली है। लोकसभा चुनाव के दौरान नेताजी ने कार्यकर्ताओं और अन्य पदाधिकारियों को नीचा दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी, उन्हें मौका मिला तो वे भी इस मौके को हाथ से नहीं जाना देना चाहते थे। जब पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं तो उन्हें मायूसी हाथ लगी।