सपा-बसपा गठबंधन में आगरा और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट बसपा के खाते में चली गई हैं। इससे सपाइयों का उत्साह ठंडा पड़ गया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव की हिदायत (मायावती का अपमान, मेरा अपमान) के बाद नेता और कार्यकर्ता 'हाथी' का साथी बनकर इसे मजबूत करने की हुंकार भर रहे हैं। दोनों सीटों पर बसपा प्रत्याशी को जिताने का दावा भी कर रहे हैं।
पिछले दिनों सपा और बसपा का गठबंधन होने के बाद दोनों के बीच गुरुवार को सीटों का निर्धारण भी हो गया। आगरा और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट दोनों बसपा के खाते में हैं। दोनों ही सीटों पर पार्टी प्रत्याशी 2014 के लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे थे।
आगरा सीट पर बसपा के नारायण सिंह सुमन को जहां 2,83,453 वोट मिले थे, वहीं सपा प्रत्याशी महाराज सिंह धनगर को 1,34,708 वोट मिले थे। फतेहपुर सीकरी सीट पर प्रत्याशी सीमा उपाध्याय को 2,53,483 वोट और सपा प्रत्याशी पक्षालिका सिंह को 2,13,397 वोट मिले थे।
बिना बुलाए बैठक में नहीं जा रहे सपाई
सपाइयों का दबे स्वर में कहना है कि दोनों सीटों पर पार्टी भले ही तीसरे पर थी, लेकिन इससे उसकी उपस्थिति बनी हुई थी। कार्यकर्ता अपनी पार्टी के चुनाव चिह्न के लिए पूरे जोश के साथ तैयारियों में जुटता था। मगर, अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
बसपा प्रत्याशी के लिए चुनावी प्रचार का दावा करने वाले सपा के नेता और कार्यकर्ता गठबंधन के इतने दिनों बाद भी घुल-मिल नहीं पा रहे। स्थिति यह है कि प्रत्याशी को लेकर होने वाली बसपा की बैठक में सपाई सिर्फ उसी में पहुंचते हैं, जिसमें उन्हें आमंत्रित किया जाता है। बिना बुलाए सपाई न तो बैठकों में जा रहे और न ही प्रत्याशी के लिए क्षेत्र में जा रहे।
सपा ने घोषित की चुनाव संचालन समिति
सीटों का बंटवारा होने के साथ ही सपा ने आगरा जिले के लोकसभा चुनाव संचालन के लिए आठ सदस्यीय समिति गठित कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल द्वारा जारी समिति में निवर्तमान जिलाध्यक्ष रामसहाय यादव को संयोजक बनाया गया है।
इनके अलावा इस समिति में पूर्व विधायक डा. राजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक मधुसूदन शर्मा, पूर्व एमएलसी राम सकल गुर्जर, निवर्तमान महानगर अध्यक्ष वाजिद निसार, पूर्व महानगर अध्यक्ष रईसउद्दीन कुरैशी, पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा व फारुख शियर को रखा गया है।