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सपा ने पुराने चेहरों पर फिर खेला दांव

Sat, 26 Mar 2016 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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सपा ने पुराने चेहरों पर फिर खेला दांव - फोटो : अमर उजाला
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अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने नौ में से छह विधानसभा सीटों पर अपने लड़ाकों के नाम घोषित कर दिए हैं। इनमें से अधिकांश चेहरे पिछले विधानसभा चुनाव वाले ही हैं। सपा सरकार में मंत्री रहे विधायक अरिदमन सिंह की पत्नी पक्षालिका सिंह का टिकट काट दिया है।
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सपा ने छह में से चार विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी रिपीट किए हैं। इनमें एत्मादपुर से डा. प्रेम सिंह बघेल, आगरा कैंट से चंद्रसेन टपलू, आगरा ग्रामीण से हेमलता दिवाकर, फतेहाबाद से डा. राजेंद्र सिंह शामिल हैं। ये चारों वर्ष 2012 के चुनाव में भी इन्हीं विधानसभा सीटों से प्रत्याशी थे। इनमें से डा. प्रेम सिंह बघेल (71478), हेमलता दिवाकर (51123) और डा. राजेंद्र सिंह (72399) दूसरे नंबर और चंद्रसेन टपलू (45684 वोट) तीसरे स्थान पर रहे थे। सपा ने खेरागढ़ विधानसभा सीट से पक्षालिका सिंह को साइकिल से उतारकर विनोद कुमार सिकरवार को प्रत्याशी घोषित किया है। हालांकि पक्षालिका सिंह (62427) पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर थीं। फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट से वर्ष 2012 में प्रत्याशी रहे डा. सत्यप्रकाश को भी किनारे कर दिया गया है। उनकी जगह राजकुमार चाहर उर्फ ‘डब्ल्यू’ (गांव मुरकिया) पर दांव लगाया है।



मंझधार में फंसे विधायक छोटेलाल
फतेहाबाद विधानसभा सीट से डा. राजेंद्र सिंह को प्रत्याशी घोषित कर सपा ने विधायक छोटेलाल वर्मा से किनारा कर लिया है। बता दें कि वर्ष 2012 में बसपा की टिकट से चुनाव जीतने के बाद छोटेलाल वर्मा ने सपा का दामन थाम लिया था। उन्होंने विधानसभा की सदस्यता खत्म होने की वजह से घोषित रूप से सपा की सदस्यता नहीं ली थी लेकिन पार्टी में वे पूरी तरह सक्रिय थे। ऐसे में सपा से टिकट न मिलने से उनकी नैया मंझधार में फंसती नजर आ रही है। वह वर्ष 2007 में सपा की टिकट से चुनाव लड़े थे और भाजपा प्रत्याशी डा. राजेंद्र सिंह से चुनाव हार गए थे। इससे पहले छोटेलाल इसी सीट से तीन बार भाजपा प्रत्याशी रह चुके हैं। वर्ष 1993 में चुनाव जीतने के बाद 1996 में चुनाव हारे। इसके बाद भाजपा से ही वर्ष 2002 में चुनाव जीते। ऐसे में भाजपा और बसपा उनसे पहले ही दूरी बना चुकी हैं। अब सपा ने भी उनसे किनारे करते हुए उन्हें मंझधार में छोड़ दिया है।
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राजकुमार चाहर क्या अब सपा में चले गए!
सपा ने फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट से राजकुमार चाहर को प्रत्याशी घोषित कर भ्रम की स्थिति खड़ी कर दी। यह नाम सामने आने के बाद राजनीति के गलियारों में भाजपा नेता राजकुमार चाहर के सपा में शामिल होने की अफवाह तेजी से फैल गई। स्थिति स्पष्ट करने के लिए भाजपा नेता तो एक-दूसरे को फोन घुमाने ही लगे, भाजपा नेता राजकुमार चाहर के पास भी फोन कॉल करने वाले काफी देर तक ‘वेटिंग’ में लगे रहे। बाद में पता चला कि सपा ने जिस राजकुमार चाहर को प्रत्याशी घोषित किया है, वे भाजपा वाले नहीं हैं। दरअसल, इस अफवाह फैलने की मुख्य वजह भाजपा नेता राजकुमार चाहर का अब तक का राजनीतिक सफर रहा। भाजपा का दामन थामकर राजनीति की शुरुआत करने वाले राजकुमार चाहर ने वर्ष 2002 में बसपा की टिकट से फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ा। इसके बाद ‘घर वापसी’ करते हुए वर्ष 2007 में भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ा। वे दोनों चुनाव हार गए। वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा ने उनसे किनारा करते हुए जितेंद्र फौजदार को चुनावी मैदान में उतार दिया। इससे खिन्न राजकुमार चाहर निर्दलीय ही चुनाव लड़े। इसमें वे 61 हजार से अधिक वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। इसके बाद वे फिर से भाजपा में शामिल हो गए। इस संबंध में राजकुमार चाहर का कहना है कि वे भाजपा के कर्मठ सिपाही हैं और वे अब किसी दूसरी पार्टी में नहीं जा रहे।

‘रनरअप’ को हरी झंडी, ‘विनर’ को रेड सिग्नल
जिले की नौ विधानसभा सीटों में से एकमात्र सीट बाह से चुनाव जीतने वाली सपा ने इसी सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित नहीं करके राजनीति गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। वर्ष 2012 में इस सीट से महेंद्र अरिदमन सिंह चुनाव जीते थे, लेकिन वर्ष 2017 के लिए घोषित किए गए प्रत्याशियों की पहली सूची में उनका नाम नहीं है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में रनरअप रहे तीन प्रत्याशियों सहित चार को ‘हरी झंडी’ दे दी गई। राजनीति पंडितों की मानें तो विनर (अरिदमन सिंह) को ‘रेड सिग्नल’ पर रोके जाने की वजह उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा रही। इसी वजह से उन्हें मंत्रीमंडल से बाहर करना भी बताया जा रहा है। चर्चा तो यहां तक कि खेरागढ़ सीट से अरिदमन सिंह पत्नी से पक्षालिका सिंह से भी इन्हीं सबके चलते सपा ने दूरी बना ली। ऐसे में उन भाजपा नेताओं के माथे की शिकन बढ़ गई है, जो फतेहाबाद सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।


आगरा दक्षिण और उत्तर क्षेत्र के लिए कवायद तेज
सपा ने आगरा दक्षिण और उत्तर जैसी दो प्रमुख विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। इन दोनों सीटों पर जोड़तोड़ जारी है। पार्टी के कई कद्दावर नेता और ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। ये दोनों सीटें काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। हालांकि शहर में सपा अब तक अपना खाता नहीं खोल पाई है।

कई का बिगड़ा गणित
पहली सूची आने से सपा में खासतौर से वे नेता परेशान हो गए हैं, जिनको पार्टी के वरिष्ठ नेता काफी पहले चुनाव की तैयारियों में जुट होने का आशीर्वाद दे चुके थे। इन्हीं में से हरेंद्र सिंह हैं। उन्हें तगड़ा झटका लगा है। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए राजपाल की पत्नी को टिकट प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद से ही बताया जा रहा था कि वे फतेहाबाद से पार्टी के प्रत्याशी होंगे। ऐसा ही फतेहपुर सीकरी से प्रवीन लोधी के साथ हुआ है। वे भी कुछ वरिष्ठ नेताओं के आश्वासन के बाद से लंबे समय से फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में सक्रिय थे।
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