फिरोजाबाद। जिले की साधन सहकारी समितियों पर यूरिया, डीएपी और एपीके खाद का टोटा है। समितियों पर खाद की कमी के कारण आगामी 20 मई के बाद खरीफ की फसल ज्वार, बाजरा एवं धान की बुवाई के लिए बैठे किसानों को उवर्रकों की किल्लत झेलनी पड़ सकती है।
जिले में मई और जून के माह में किसान खरीफ की फसल की बुवाई शुरू कर देता है। हालांकि जिले में संचालित कुल 82 साधन सहकारी समितियों में अधिकांश पर डीएपी और एनपीके आदि उर्वरकों का स्टॉक काफी कम है। ऐसे में किसानों के सामने संकट खड़ा हो सकता है।
सबसे ज्यादा परेशानी जसराना, एका,मदनपुर एवं अरांव आदि क्षेत्रों के धान बाहुल्य इलाकों में है। इसका प्रमुख कारण सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख उर्वरक निर्माता संस्था इफको द्वारा जिले को मांग के अनुरूप डीएपी और एनपीके उर्वरकों की आपूर्ति नहीं किया जाना है।
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1.20 हजार हेक्टेयर में होती खरीफ की फसल
10 हजार टन डीएपी की किसानों को पड़ती है जरूरत
20 हजार टन यूरिया खाद की भी पड़ती है जरूरत
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जायद की फसल करने वालों को भी होती है उर्वरकों की जरूरत
जायद की फसल में शुमार खीरा, ककड़ी, हरी सब्जियां, मूंग के अलावा तरबूज और खरबूज की फसल करने वाले किसानों को भी इन दिनों मामूली मात्रा में यूरिया की जरूरत होती है।
जिले की साधन सहकारी समितियों पर फिलहाल करीब सात हजार क्विंटल डीएपी और एनपीके खाद होनी चाहिए। खरीफ की फसल बुवाई का समय नजदीक है। ऐसे में जरूरी उर्वरकों की आपूर्ति सुचारु कराने के लिए निदेशक मंडल को करीब दो हजार मीट्रिक टन की डिमांड भेजी गई है।
बीके निगम, क्षेत्रीय अधिकारी इफको
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समितियों पर उर्वरकों की कमी के बारे में तत्काल कोई जानकारी नही है। डीएपी अथवा एनपीके खाद की कमी होने पर समितियों पर उर्वरक का स्टॉक सुनिश्चित कराया जाएगा। हालांकि पीसीएफ के माध्यम से ही समितियों पर उर्वरकों की आपूर्ति का प्रावधान है।
विवेक यादव सहायक निबंधक सहकारिता