कासगंज सोरों में भगवान वराह की पूजा करते श्रद्घालु।
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सोरों। नगर पालिका परिषद के अभिलेखों से सूकरक्षेत्र नाम हटाने पर लोगों ने आपत्ति जताई है। सोरों के स्थान पर फिर से सूकरक्षेत्र नाम करने की मांग की है। इस संबंध में पालिका से शिकायत भी है। तीर्थपुरोहित दाऊदयाल चौधरी का कहना है कि एक वर्ष से नगर पालिका के अभिलेखों में नगर का नाम सोरों सूकरक्षेत्र (कासगंज) था, लेकिन अब इसके स्थान पर सोरों (कासगंज) लिखा आ रहा है।
इसकी शिकायत उन्होंने पालिका परिषद कार्यालय में की है। कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सोरों तीर्थनगरी को सूकरक्षेत्र के रूप में मान्यता आज से 40 वर्ष पूर्व ही दी जा चुकी है। सोरों के पौराणिक इतिहासविद डॉ. प्रभाकर पाराशरी ने बताया कि आदि काल में भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष नाम के राक्षस का वध करने के लिए सूकर के रूप में तीर्थनगरी की धरा पर अवतार लिया था। इसीलिए इस तीर्थस्थल का पौराणिक ग्रंथों में सूकरक्षेत्र नाम भी वर्णित है। केंद्र सरकार ने 1979 में इस तीर्थ को सूकरक्षेत्र के रूप में अधिकारिक मान्यता दी है। तत्कालीन रेल मंत्री मधु दंडवते के आदेश पर सोरों रेलवे स्टेशन का नाम सोरों सूकरक्षेत्र किया था। डाक विभाग द्वारा भी सोरों डाकघर का नाम सोरों सूकरक्षेत्र किया था। सोरों नगर पालिका ने एक वर्ष से अभिलेखों व बैठक एजेंडों, पत्र आदि में सूकरक्षेत्र शब्द हटा दिया है।
बोर्ड की बैठक में रखेंगे प्रस्ताव
पालिका बोर्ड की आगामी बैठक में सोरों के साथ सूकरक्षेत्र शब्द जोड़े जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड ने अगर पास कर दिया तो फिर से सूकरक्षेत्र लिखना शुरू हो जाएगा। -संतराम सरोज, अधिशाषी अधिकारी।