फोटो16 सोरोंजी के मुख्य बाजार बदरिया स्थित बद्रेश्वर अखाड़े के सामने बंद पड़ा सार्वजनिक शौचाल
कासगंज। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले नगर पालिका, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च कर सामुदायिक शौचालय बनाए गए। अधिकांश शौचालय या तो प्रयोग में नही हैं या फिर उन पर ताला लटका पड़ा है।
जिले की 423 ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन की तहत खुले में शौच मुक्ति के लिए वर्ष 2014 में अभियान शुरू किया गया। पंचायती राज विभाग ने बेस लाइन सर्वे के अनुसार, वर्ष 2014 से 2019 तक 1,89,392 व्यक्तिगत शौचालय बनाए गए। लोगों को शौचालय की सुविधा देने के साथ ही उन्हें खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक किया गया। वर्ष 2019 में जिले को भले ही ओडीएफ घोषित कर दिया गया, लेकिन अधिकांश ग्राम पंचायतों में आज भी व्यवहार में परिवर्तन नहीं हुआ। लोगों के घरों में बने शौचालय या तो बंद पड़े हुए हैं या फिर व जर्जर होने के बाद प्रयोग में नहीं है। जिले के 10 निकाय क्षेत्रों में 50 सामुदायिक शौचालय बनाए गए है। नगर पालिका व नगर पंचायतों अधिकांश सामुदायिक शौचालयों की हालत बदहाल है। कुछ पर ताले लटके हैं तो कई जगहों पर टूटी पड़ी टोंटियां और गंदगी लोगों की मजबूरी का मजाक उड़ाती नजर आती है।
कासगंज में पुराने एसडीएम ऑफिस के पास बने सामुदायिक शौचालय में ताला लटका है। वहीं रोडवेज बस स्टैंड पर महिलाओं के लिए बने पिंक शौचालय पर लटके ताले अपनी हकीकत बयां करा है। इसके साथ ही 6 अन्य स्थानों पर सार्वजनिक शौचालयों का यही हाल है। सोरोंजी तीर्थनगरी के मुख्य बाजार बदरिया स्थित बद्रेश्वर अखाड़े के सामने बना सार्वजनिक शौचालय बंद पड़ा है। इसका निर्माण 2018 में नगर पालिका ने कराया था। 8 सीट वाला आधुनिक शौचालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इसमें न पानी का टैंक है और न ही टोंटियां। प्रकाश की व्यवस्था भी नहीं है। इसके आस-पास गंदगी भी जमा है। ढोलना के गांव फिरोजपुर में बने व्यक्तिगत शौचालय का प्रयोग नहीं हो रहा है। उस पर ताला लगाकर ग्रामीणों ने पुआल रख दिए हैं। डीपीएम, राजदीप ने बताया कि निकाय क्षेत्रों में लोगों के सुविधा के लिए सामुदायिक शौचालय बनाए गए है। कासगंज व सोरोंजी में बंद पड़े सामुदायिक शौचालय को सुचारू करने लिए नगर पालिका को निर्देश दिए गए है। इससे लोग सार्वजनिक शौचालय का प्रयोग कर सकें।