जलभराव में नहीं लगेगा गड्ढों का अंदाजा
चोर उठा रहे लाइटें खराब होने का फायदा
न्यूमेरिक
नगर निगम के वार्ड................. 90
शहर में स्ट्रीट लाइट............46,000
स्ट्रीट लाइट के खराब पाइंट..17,000
स्ट्रीट लाइट का बिल........ 02 करोड़ रुपये
प्रकाश व्यवस्था पर वार्षिक खर्च...7.5 करोड़
मानसून में ज्यादा बारिश की मौसम विभाग की भविष्यवाणी के ठीक उलट शहर के हालात बने हुए हैं। न जर्जर सड़कों को ठीक किया गया है और न जलभराव से निपटने के इंतजाम। ऊपर से 40 फीसदी स्ट्रीट लाइटें बुझी पड़ी हैं। सूरज ढलने के साथ शहर की हर दूसरी गली, तीसरा चौराहा रात में अंधेरा में डूब जाता है। जब अभी से यह हाल है तो बारिश के दिनों में ये गलियां और डराने वाली हैं। क्योंकि अंधेरे में गड्ढों का अंदाजा लगाना नामुमकिन होगा। कई नाले ऐसे हैं, जिनकी बाउंड्री तक नहीं है। नतीजतन, हादसे का खतरा और भी बढ़ जाएगा।
ताजमहल के शहर को रात में रोशन रखने के लिए नगर निगम ने वार्षिक बजट करीब 7.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस राशि को लाइटों की खरीद, मशीनरी और मरम्मत के उपकरणों पर खर्च किया जाता है। शहर में करीब 46,000 स्ट्रीट लाइट प्वाइंट (प्रकाश बिंदु) हैं। इन प्रकाश बिंदुओं को चालू रखने के लिए टोरंट पावर कंपनी को प्रतिवर्ष करीब दो करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। इसके बावजूद शहर के प्रमुख मार्गों को छोड़कर कालोनियों और मोहल्लों के अलावा हर दूसरी गली और तीसरा चौराहा पर अंधेरा छाया रहता है।
नगर निगम के सूत्रों की मानें तो करीब 17,000 प्वाइंट खराब हैं। परेशान जनता सीधे नगर निगम, आनलाइन, तहसील दिवस और प्रशासन के माध्यम से शिकायत कर रही। पिछले दिनों मुस्लिम समाज ने भी रमजान की बैठक में यह मुद्दा उठाया था। आल इंडिया मुस्लिम पैट्रोटिक फ्रंट के संयोजक अहमद हसन ने भी स्ट्रीट लाइटें खराब रहने की शिकायत की है।
टोरंट पावर भी बढ़ा रही परेशानी
टोरंट पावर ने कई इलाकों में अंडरग्राउंड लाइन डाली है। इससे स्ट्रीट लाइटों के प्वाइंट नहीं जोड़े हैं, इस वजह से स्ट्रीट लाइट बुझी पड़ी हैं। इन्हें भी देखना वाला कोई नहीं है।
46 हजार लाइटों की मरम्मत को नौ कर्मचारी
खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। नियमों के मुताबिक, प्रति 2,000 प्रकाश बिंदुओं पर कम से कम एक लाइनमैन की तैनाती होनी चाहिए। इस हिसाब से आगरा में करीब 23-25 लाइनमैन होने चाहिए। लेकिन यहां महज नौ लाइनमैनों से काम लिया जा रहा है। वे क्रेन ही चलाते हैं। पांच की जगह तीन जूनियर इंजीनियर हैं। दो रिटायर होने वाले हैं। सहायक इंजीनियर एक भी नहीं है।
‘एलईडी लाइटों की खरीद अभी हो नहीं पा रही है। खराब लाइटों को दुरुस्त करने के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं हैं। जबकि उपकरण खरीद के लिए नगर निगम सदन से स्वीकृति मिल चुकी है।’
रवि माथुर, पार्षद
‘एलईडी लाइटों की खरीद के लिए पार्षदों की समिति बनी है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद खरीद का रास्ता का खुलेगा। सीमित संसाधनों के उचित प्रयोग से लाइटों को दुरुस्त भी कराया जा रहा है।’
संजय कटियार, अधिशासी अभियंता प्रभारी प्रकाश विभाग, नगर निगम
19 दिन में 50 चोरियां
चोरों ने भी हद कर दी है। जून में हाफ सेंचुरी बना चुके हैं। स्ट्रीट लाइटें खराब होने से फैला अंधेरा इनका काम आसान कर देता है। जो भी मकान बंद मिला, उसे साफ कर देते हैं। ट्रांसयमुना में 12 चोरियां हुई हैं। देवरी रोड की छह कालोनियां में घर खंगाले गए हैं। दयालबाग में कल्याणी हाइट्स, कमला नगर , शहीद नगर, ताजगंज में भी वारदात हो चुकी हैं।