सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि लखनऊ मुख्यालय को सूचना मिली थी कि फव्वारा स्थित दवा बाजार में सैंपल की दवाओं का अवैध कारोबार हो रहा है। इस पर मुख्यालय स्तर से विशेष टीम बनाई गई। टीम ने शाम करीब पांच बजे माहेश्वरी कॉम्प्लेक्स में छापा मारा। तीसरी मंजिल पर गैलरी में कार्टन रखे हुए थे।
आसपास के मेडिकल स्टोर संचालकों से जानकारी की तो किसी ने दवाओं को अपना नहीं बताया। कार्टन खोले गए तो इसमें एंटीबायोटिक, पेट दर्द और लिवर समेत कई तरह की दवाएं भरी हुई थीं। इसमें स्पासमो प्रॉक्सीवॉन प्लस टैबलेट बिना सैंपल की हैं। इनकी कीमत 3.20 लाख रुपये है। बाकी दवाएं सैंपल की हैं, जिन पर नॉट फॉर सेल लिखा है। दवाओं को जब्त कर नमूने लिए गए। दुकानों पर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देखी जा रही है जिससे ये पता चल सके कि दवाएं लेकर कौन आया है। सोमवार को भी कार्रवाई होगी।
सहायक आयुक्त औषधि ने बताया कि बरामद दवाओं में से एक बिना सैंपल की है। सैंपल की दवाएं डॉक्टरों को देने के लिए होती हैं। उन्हें दुकानों पर बेचना अवैध है।
नौ जिलों के अधिकारियों ने मारा छापा
मुख्यालय से बनी विशेष टीम में नौ जिलों के अधिकारी शामिल रहे। इसमें लखनऊ मुख्यालय के सहायक आयुक्त औषधि डीके तिवारी, औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर, गाजियाबाद के आशुतोष मिश्रा, कानपुर के ओमपाल सिंह, मेरठ के गौरव लोधी, आगरा के नवनीत कुमार, मैनपुरी के दीपक कुमार, बरेली की अनामिका जैन, इटावा के नीलेश शर्मा और जौनपुर के रजत पांडे शामिल रहे। टीम जांच के लिए कई मेडिकल स्टोरों की सूची भी बनाकर लाई है।
छापा पड़ते ही भागे मेडिकल स्टोर संचालक
छापा पड़ते ही दवा बाजार में अफरा-तफरी मच गई। कई दुकानदार मेडिकल स्टोर और फर्म का शटर बंद कर भाग गए। टीम ने सभी की सूची बनाई है। नोटिस जारी कर पूछताछ की जाएगी। संतोषजनक जवाब न मिलने पर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
नकली, सरकारी और सैंपल की दवाओं की तस्करी
औषधि विभाग की टीम आगरा में पहले भी नारकोटिक्स श्रेणी, नकली, सरकारी और सैंपल की दवाओं की तस्करी पकड़ चुकी है। 2021 में कमला नगर निवासी दवा माफिया पंकज गुप्ता के यहां से सैंपल, सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का गैंग पकड़ा था। बीते दिनों ही ईएसआई अस्पताल की सरकारी दवाएं बेचने पर वरदान मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस निरस्त किया गया था।