स्मार्ट सिटी के कार्यालय में कंट्रोल रूम में काम करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
जैसे ही कोई अपराधी सड़क पर पहुंचेगा, वैसे ही पुलिस को पता चल जाएगा। न केवल उसकी लोकेशन मिल जाएगी बल्कि तस्वीर और जुर्म की कुंडली भी मिल जाएगी। यह मुमकिन होगा 31 दिसंबर से। दरअसल, स्मार्ट सिटी का इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर 31 दिसंबर से लाइव काम करने लगेगा। अपराधी के 850 स्मार्ट कैमरों की जद में आते ही त्रिनेत्र सॉफ्टवेयर में दर्ज 5000 अपराधियों में से चेहरे का मिलान किया जाएगा। यह फेस रिकग्निशन सिस्टम से होगा।
पुलिस ने चौक-चौराहों पर लगे कैमरों के साथ त्रिनेत्र सॉफ्टवेयर को जोड़ा है। इसमें अपराधियों के फोटो और डाटा है। इस सॉफ्टवेयर को स्मार्ट सिटी ने स्मार्ट कैमरों से जोड़ा है। कैमरों में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम लगा है। जैसे ही कोई त्रिनेत्र सॉफ्टवेयर में दर्ज 5000 अपराधियों में से कोई सड़क पर आएगा। यह फेस रिकग्निशन सिस्टम उसे पहचान लेगा। फोटो कंट्रोल रूम में भेज दिया जाएगा।
वहां पुलिसकर्मी की स्क्रीन पर अलर्ट आ जाएगा। वह अपराधी की लोकेशन मालूम कर लेगा। स्मार्ट सिटी के सीईओ निखिल टी. फुंडे ने बताया कि कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को लाइव करने की योजना है। 1216 कैमरों में से 850 सीसीटीवी कैमरे लग चुके हैं।
स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम
- फोटो : अमर उजाला
ई-चालान काटे जा रहे हैं कैमरों के जरिए
स्मार्ट सिटी के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में अभी ई-चालान काटे जा रहे हैं, लेकिन इन्हें पुलिसकर्मी ही कैमरों में देखकर जारी कर रहे हैं, लेकिन एक जनवरी से कमांड सेंटर के कंप्यूटर और कैमरे ही अपने आप चालान काटना शुरू करेंगे।
ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन सवारों का ब्योरा इस शनिवार को ही आरटीओ के वाहन सॉफ्टवेयर से जुड़ जाने के कारण कमांड सेंटर के पास है। स्मार्ट सिटी 215 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित कर चुका है। यह पुलिसकर्मी केवल कंप्यूटर द्वारा जारी ई-चालान को क्लिक कर भेजेंगे।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से ये सेवाएं जुड़ीं
- चौराहों पर पैनिक बटन से इमरजेंसी में मदद
- ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले सवारों का ई-चालान
- इंटैलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का संचालन
- पुलिस के वाहनों पर पीईजेड और बॉडी वार्न कैमरा
- शहर से खत्ताघर तक कचरा ले जाने वाले वाहनों की लोकेशन
- डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में आरएफआईडी स्कैनिंग
- शहर के 100 वार्डों का जीआईएस नक्शा
- 39 जगहों पर पर्यावरण सेंसर के जरिए प्रदूषण स्तर
तीन महीने चलेगा ट्रायल
31 दिसंबर तक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को लाइव कर दिया जाएगा। तीन महीने तक इसका ट्रायल चलेगा और खामियों को दूर किया जाएगा। सेंटर की सभी व्यवस्थाएं उससे पहले पूरी कर ली जाएंगी। उसके बाद एक अप्रैल से यह विधिवत संचालित होने लगेगा। - निखिल टी. फुंडे, सीईओ, आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड