लॉकडाउन ने आगरा के लघु उद्योग को भी तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। औसतन 8000 करोड़ रुपये का झटका लगा है। इतना ही नहीं कारोबार एक साल पीछे की स्थिति में चले गए हैं।
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जूता उद्योग:
आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष गागन दास रामानी ने बताया कि ताजनगरी में जूते के छोटे बड़े करीब पांच हजार कारखाने हैं। अभी भी 4500 कारखानों में काम ठप है। यातायात व्यवस्था सुचारु न हो पाने से माल का आवागमन प्रभावित है। बाहर का व्यापारी भी नहीं आ पा रहा है। लॉकडाउन से अब तक औसतन दो हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। कारोबार 10% रह गया है।
एक नजर: 5000 इकाइयां, तीन लाख लोगों को रोजगार, तीन हजार करोड़ का टर्नओवर, मांग नदारद, कच्चा माल पर्याप्त।
सराफा कारोबार:
सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने बताया कि कि देश में आगरा का चांदी उद्योग प्रमुख स्थान रखता है। लेकिन, नोटबंदी से ही कारोबार प्रभावित होना शुरू हो गया। इधर, लॉकडाउन से हाशिये पर आ गया। इस समय काम एक चौथाई ही रह गया है। औसतन एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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एक नजर: एक हजार कारखाने, दो हजार करोड़ का टर्नओवर,दो लाख लोगों को रोजगार, कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर।
फाउंड्री उद्योग:
आगरा आयरन फाउंडर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमर मित्तल ने बताया कि शहर में फाउंड्री और इससे जुड़ी करीब 600 इकाइयां हैं। लॉकडाउन से लगभग 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस घाटे की भरपाई करने में एक साल का वक्त लग जाएगा। इस समय कारोबार में 50 फीसदी की गिरावट है।
एक नजर: 600 इकाइयां. एक हजार करोड़ का टर्नओवर. तीन लाख लोगों को रोजगार. 50 फीसदी की गिरावट।
प्लास्टिक इंडस्ट्री:
प्रमुख उद्यमी संजीव मित्तल ने बताया कि कारोबार आधा हो गया। जो पहले के आर्डर थे, उन्हें पूरा कर दिया, अब नए ऑर्डर नहीं आ रहे। बताया कि प्लास्टिक उद्योग को औसतन 400 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। जो एक साल में भी भरपाई नहीं होने वाली।
एक नजर: 100 इकाइयां. 800 करोड़ का टर्नओवर. 15 हजार लोगों को रोजगार. कच्चे माल की उपलब्धता 60 फीसदी।
मार्बल हैंडीक्राफ्ट उद्योग
आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के अध्यक्ष प्रह्लाद अग्रवाल ने बताया कि लॉकडाउन भले खत्म हो गया हो, लेकिन पर्यटन उद्योग के लिए संकट अब भी बरकरार है। मार्बल हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री के लिए आगे भी उम्मीद नहीं है, क्योंकि उद्योग पर्यटकों पर निर्भर है। 1300 करोड़ का घरेलू कारोबार प्रभावित हुआ है। लॉकडाउन से पूर्व के करीब 35 हजार कारीगरों के लिए रोजी रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है।
एक नजर: 500 एम्पोरियम, 2000 करोड़ का टर्नओवर. 700 करोड़ का निर्यात. -35 हजार लोगों को रोजगार।
कालीन उद्योग
आगरा फ्लोर कवरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष रामदर्शन शर्मा ने बताया कि उद्योग को औसतन 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। 30 हजार बुनकरों के समक्ष संकट खड़ा हो गया। इस समय मांग न के बराबर है, आगे भी संभावनाएं नहीं दिख रहीं हैं।
एक नजर: 35 इकाइयां. 125 करोड़ का टर्नओवर. 30 हजार लोगों को रोजगार. कच्चे माल की उपलब्धता ठीक।
हम एक साल पीछे चले गए हैं
ताजनगरी में जूता, सराफा, प्लास्टिक, फाउंड्री, हैंडीक्राफ्ट, कालीन आदि उद्योगों की 5000 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। लॉकडाउन से सभी को मिलाकर औसतन 8000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हम लगभग एक साल पीछे चले गए हैं। हालांकि सरकार मदद करने में लगी हुई है। -राकेश गर्ग, उपाध्यक्ष लघु उद्योग निगम लिमिटेड
बैंक ऋण देने में हिचकिचा रहे
सरकार ने उद्यमियों को संकट से उबारने के लिए राहत पैकेज की घोषणा की थी, लेकिन बैंक मदद नहीं कर रहे हैं। कोलेट्रल सिक्योरिटी और प्रोसेसिंग फीस भी वसूलने की शिकायत है। एनपीए के भय से ऋण देने से भी हिचकिचा रहे हैं, इसलिए नकदी की तरलता और नुकसान कम नहीं हो रहा है। -राजीव अग्रवाल, अध्यक्ष नेशनल चैंबर
आगरा में गारमेंट हब बनेगा: चौधरी उदयभान
प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चौधरी उदयभान सिंह ने बताया कि आगरा में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए वह निरंतर प्रयासरत हैं। फतेहपुर सीकरी के विधायक राज्य मंत्री चौधरी उदयभान सिंह ने बताया कि आगरा में गारमेंट हब बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो सकेगा।
उन्होंने बताया कि एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत आगरा के उत्पादों का बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार किया गया है। इसके साथ ही एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत वर्चुअल प्रदर्शनी लगाकर भी इसका लाभ उद्यमियों को दिलाया जाएगा। साथ ही प्रदेश में सबसे ज्यादा लघु उद्योगों के लिए प्रोजेक्टों और उद्योग लगाने के लिए ऋण को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही आगरा की परंपरागत कलाओं जैसे जरदोजी, मार्बल, कालीन, माटी कला को बढ़ावा देने के लिए इन्हें लघु उद्योगों में शामिल करके प्रोत्साहन दिया जा रहा है।