रेलवे अधिकारियों की लापरवाही कभी भी बड़ा हादसा करा सकती है। आगरा फोर्ट-बांदीकुई डीएमयू में पिछले 15 दिनों से मोटर कैब-2 (गार्ड के बैठने लिए) नहीं लग रही। विकल्प के तौर पर गार्ड के लिए एसएलआर लगाया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा भी नहीं हो रहा। इस कारण मुख्य गार्ड की जगह सहायक गार्ड इंजन में बैठकर चल रहा है। शनिवार को भी गाड़ी को ऐसे ही चलाया गया।
शनिवार को फोर्ट-बांदीकुई डीएमयू ट्रेन बिना कैब व गार्ड के ही भरतपुर से आई। बताया जाता है कि डीएमयू की मोटर कैब-2 खराब हो गई है। सूत्रों की मानें तो एसएलआर न लगने पर मुख्य गार्ड ने ट्रेन में चलने से इंकार कर दिया है। ऐसे में सहायक गार्ड को ही इंजन में बैठाकर भेजा रहा है। सूत्रों की मानें तो यह सिलसिला पिछले 15 दिनों से चल रहा है।
गार्ड की जिम्मेदारियां
गार्ड पूरी ट्रेन का (ट्रेन जहां से ओरिजनेट हुई है और आखिरी स्टेशन तक) इंचार्ज होता है। इस दौरान जो भी समस्या आएंगी, उनका समाधान कराने व निर्णय लेने की जिम्मेदारी गार्ड पर होती है। वहीं, चालक से लेकर कंट्रोल और स्थानीय स्तर पर सूचनाओं का आदान-प्रदान करने व इसकी जिम्मेदारी संभालता है।
स्पेलिंग में गार्ड का महत्व
जी- गार्जियन ऑफ द ट्रेन
यू- एंपायर आफ द वर्किंग टीम
ए- असिस्टेंट टू द पब्लिक
आर- रीप्रंजटेटिव ऑफ द रेलवे
डी- डिबोटी टू हिज ड्यूटी
विकल्प
डीएमयू में दोनों ओर मोटर कैब-1 और 2 होता है। अगर एक कैब खराब हो गई तो रेलवे को उसमें एसएलआर लगाना चाहिए। बिना एसएलआर के ट्रेन का संचालन खतरे से खाली नहीं। पूरी जिम्मेदारी गार्ड के ऊपर है।
वर्जन:
-ऐसा नहीं हो सकता कि ट्रेन को बिना गार्ड के रवाना किया जाए। इसकी जांच कराई जाएगी।
भूपेंदर ढिल्लन, जनसंपर्क अधिकारी
-अगर ट्रेन में गार्ड का एसएलआर या मोटर कैब-2 नहीं चल रही तो यह मामला गंभीर है। गार्ड ही पूरी ट्रेन को संचालित करता है।
- एके दीक्षित, रिटायर्ड गार्ड व पूर्व मंडल सचिव एनसीआरईएस