पूर्व जूनियर इंजीनियर हरिकिशोर तिवारी
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राजनीतिक गलियारों में समीकरण तेजी से बदलते हैं। इसका ताजा उदाहरण इटावा के रहने वाले पूर्व जूनियर इंजीनियर हरिकिशोर तिवारी हैं। पिछले चुनाव में शिक्षक और स्नातक खंड की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सीधी चुनौती देने वाले हरिकिशोर तिवारी छह साल बाद अब उसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में जेई की नौकरी से वीआरएस लेने वाले तिवारी को भाजपा ने मौजूदा शिक्षक एमएलसी आकाश अग्रवाल के खिलाफ मैदान में उतारकर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। हरिकिशोर तिवारी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। इटावा निवासी तिवारी वर्ष 1980 से 1986 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के इटावा जिलाध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे। हालांकि, 1986 में पीडब्ल्यूडी में जेई के पद पर चयन होने के बाद उन्होंने प्रत्यक्ष राजनीति से दूरी बना ली।
सरकारी सेवा में रहते हुए भी वे शांत नहीं बैठे और लगभग 12 वर्षों तक कर्मचारी राजनीति में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। साल 2020 में उन्होंने स्नातक एमएलसी का चुनाव लड़ने का मन बनाया और इसके लिए अपनी सरकारी नौकरी से वीआरएस (स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति) ले लिया। उस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार मानवेंद्र प्रताप सिंह को कड़ी टक्कर दी और करीब 24 हजार वोट हासिल किए। हालांकि वे चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर सके लेकिन इस शानदार प्रदर्शन ने उनकी जमीनी पकड़ और जनसमर्थन को साबित कर दिया।
पुराना जुड़ाव आया काम
पार्टी के खिलाफ 2020 में चुनाव लड़ने के बावजूद पुराना संघ-भाजपा जुड़ाव, कर्मचारी वर्ग में प्रभाव और लोगों के बीच पकड़ तिवारी के काम आया। इसी को देखते हुए पार्टी के शीर्ष नेताओं ने लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें भाजपा में शामिल कर लिया। अब पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए शिक्षक एमएलसी चुनाव में मौजूदा एमएलसी आकाश अग्रवाल के सामने प्रत्याशी बनाया है।